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विश्व उर्दू सम्मेलन } दो दिवसीय सम्मेलन में तुर्की, ईरान और अमेरिका से आए उर्दू के विद्वानों ने कहा

5 वर्ष पहले
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उर्दूहमारी भाषा है क्योंकि तुर्की मूल के कई लोगों ने इसे बढ़ाया और सींचा है। अमीर खुसरो से लेकर मिर्जा गालिब तक उर्दू की सेवा करने वालों की लंबी सूची है। यहीं कारण है कि उर्दू को मैं अपनी भाषा भी मानता हूं। यह बातें शनिवार को एएन सिन्हा संस्थान में आयोजित दो दिवसीय विश्व उर्दू सम्मेलन में शिरकत करने तुर्की से आए प्रो. खलील तौकॉर ने कही।

उद‌्घाटन समारोह में उन्होंने कहा कि उर्दू तुर्की की तीन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई जा रही है। पिछले साल ही तुर्की में उर्दू का शताब्दी समारोह मनाया गया है। हम उर्दू इसलिए पढ़ रहे हैं कि यह एक महत्वपूर्ण भाषा है। उन्होंने कहा कि तुर्की और हिन्दुस्तान में काफी पुराना रिश्ता है। खिलाफत आंदोलन में यहां के लोगों ने तुर्की का समर्थन किया था यह हमें आज भी याद है। तुर्की में हमें अपनी भाषा अपनी जान से भी प्यारी है लेकिन दुख की बात है कि यहां उर्दू की स्थिति अच्छी नहीं है जो कि आपकी मातृभाषा है। उर्दू का यही हाल रहा तो आने वाले वर्षों में यह भाषा नहीं बचेगी। इसे बचाने के लिए अपने घरों में इसे बोलना शुरू करंे। माताएं इसकी हिफाजत के लिए आगे आएं और अपने बच्चों को इसकी शिक्षा दे।

बिहार उर्दू अकादमी की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में ईरान से आई डॉ वफा यजदान मनिष ने कहा कि ईरान में उर्दू अदब पिछले दस वर्षों में काफी आगे बढ़ी है। तेहरान यूनिवर्सिटी में बीए और एमए स्तर पर इसकी पढ़ाई होती है। उर्दू के माध्यम से विभिन्न देशों में आपसी रिश्ते बन रहे हैं। उर्दू वाले अपनी भाषा को बचाने लिए सजग हों, अंग्रेजी के शब्दों को इसमें मिलाएं। अमेरिका से आए जामिन जाफरी ने कहा कि दुनिया में कोई भी किसी भाषा को नहीं मार सकता, अगर भाषा मरती है तो वह सिर्फ उसके बोलने वालों की उपेक्षा से मरती है। उर्दू को मजहब की कैद से आजाद करना होगा, क्योंकि भाषा किसी मजहब की नहीं हो सकती है। कार्यक्रम में राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री डॉ अब्दुल गफूर ने कहा कि सरकार उर्दू के विकास के लिए प्रयासरत है। उर्दू के विकास के लिए हमारी ओर से विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

उन्होंने उर्दू भाषियों से इसके विकास के लिए आगे आने की अपील की। वहीं स्वागत संबोधन में मौलाना मजहरूल हक अरबी फारसी यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. एजाज अली अरशद ने कहा कि उर्दू को नई बस्तियों और तहजीब की जबान बनानी होगी। कौमी काउंसिल फरोग उर्दू के अध्यक्ष प्रो. इरतजा हुसैन ने कहा कि उर्दू के विकास के लिए मतभेदों को दूर करना होगा। अध्यक्षता बिहार उर्दू अकादमी के उपाध्यक्ष सुल्तान अख्तर ने कही वहीं मंच संचालन मुश्ताक अहमद नूरी ने किया। इस दाैरान बड़ी संख्या में उर्दू के विद्वान मौजूद थे।

एएन सिन्हा संस्थान में आयोजित बिहार उर्दू अकादमी द्वारा विश्व उर्दू सम्मेलन में उपस्थित अल्पसंख्यक मंत्री अब्दुल गफ्फूर।

asinha institute

मजहब की कैद से आजाद हो उर्दू

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