देव कार्तिक छठ मेला को मिल गया राजकीय मेला का दर्जा

5 वर्ष पहले
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औरंगाबाद सदर (पटना).  देव कार्तिक छठ मेला को राजकीय मेला का दर्जा मिल गया। इसकी घोषणा बुधवार को सूबे के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री रामनारायण मंडल ने की। मंत्री ने यह घोषणा देव कार्तिक छठ मेला का उद्घाटन करने के बाद की। उद्घाटन समारोह में पिछड़ा एवं अति पिछड़ा  वर्ग कल्याण मंत्री सह जिले के प्रभारी मंत्री ब्रजकिशोर बिंद, सांसद सुशील कुमार सिंह, विधायक आनंद शंकर सिंह, एमएलसी राजन कुमार सिंह, पूर्व मंत्री रामाधार सिंह, डीएम कंवल तनुज व एसपी डाॅ. सत्यप्रकाश सहित कई अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद थे। राजस्व व भूमि सुधार मंत्री ने कहा कि देव का अब सर्वांगीण विकास होगा। इस बार ही मेले की राशि बढ़ा दी गई है। 
 
यहां सूर्य की उपासना से मिलती है विशेष कृपा 
- ओडिसा का कोणार्क सूर्य मंदिर, पाकिस्तान के पेशावर स्थित कालपी मंदिर व औरंगाबाद का देव सूर्य मंदिर तीन ऐसी जगहें हैं, जहां सूर्य की किरणें सीधी पड़ती है। सूर्य की किरणें सीधी पहुंचने का आशय इससे है कि यहां सूर्य की आराधना करने वालों पर उनकी कृपा अधिक बनी रहती है।
- इसका जिक्र भविष्य पुराण में किया गया है। इस पुराण के मुताबिक धरती पर इंद्र वन, मुंडीर वन व कालपी भगवान सूर्य का मुख्य स्थान है। ज्योतिषाचार्य पं सतीश पाठक ने बताया कि इसका प्रमाण इससे भी मिलता है कि देव व कोणार्क मंदिर के गुंबज पर बेशकीमती नीलम पत्थर के सांचे में एक समान सोने का कलश स्थापित है।
 
सूर्य मंदिर नागर शैली का अदभुत नमूना 
 
 
- देव सूर्य मंदिर का निर्माण गुजरात के राजा इला के पुत्र एल ने 8वीं सदी में कराया था। त्रेतायुगीन यह मंदिर नागर शैली का अदभुत नमूना है। इसका शिखर 100 फीट ऊंचा है। एक बार यात्रा के दौरान प्रवास पर थे।
- देव में विश्राम के दौरान जब प्यास लगी तो वे पास के गड्ढे से पानी लाकर पी लिए। जहां-जहां पानी से उनका शरीर स्पर्श हुआ, उनके शरीर का कुष्ठ रोग ठीक होता चला गया। फिर रात में उन्हें एक स्वप्न आया कि उस गड्ढे में सूर्य की मूर्ति है, जिसकी स्थापना करो। इसके बाद एल ने मंदिर का निर्माण कराया और सूर्यकुंड खुदवाया।  
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