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दीघा सड़क पुल: नौकरी नहीं तो जमीन नहीं, एप्रोच रोड में पेच

5 वर्ष पहले
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सोनपुर। जमीन लीजिएगा तो नौकरी देनी होगी। एक ही पुल पर रेल और सड़क पुल है। रेलवे ने जमीन के बदले नौकरी दी तो रोड के लिए जमीन देने पर नौकरी क्यो नहीं।’ चौसिया गांव के लोगों के इस तर्क पर सोनपुर अनुमंडल प्रशासन और बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अधिकारी बेबस हैं। राज्य सरकार की लीज नीति में जमीन के बदले नौकरी देने का नियम नहीं है। इस नीति में जमीन के बदले उसके एमवीआर (जमीन के न्यूनतम मूल्य) का चौगुना दाम देने की व्यवस्था है।

सरकार के अधिकारियों ने शनिवार को चौसिया के ग्रामीणों को दीघा सड़क सेतु की महता और गांधी सेतु की बदहाली की वस्तुस्थिति को विस्तार से समझाया। कहा कि पुल निगम के अधिकारी आपके दरवाजे पर आकर जमीन के बदले उसकी राशि का चेक हाथों में सौंपेंगे, पर अधिकारियों की बात अनसुना कर ग्रामीण नौकरी की मांग पर अड़े रहे। दरअसल, दीघा सड़क सेतु तैयार पर है एप्रोच रोड का निर्माण अब भी हवा में है। जमीन का संकट अब भी बरकरार है। दीघा रेल सह सड़क सेतु निर्माण के अंतिम चरण में है, पर 2.56 किमी सड़क एप्रोच के लिए अब तक जमीन की व्यवस्था ही नहीं हो पाई है। इस एलाइनमेंट पर चार गांव की जमीन है। गंगाजल, भरपुरा, चौसिया और सुलतानपुर। इसमें दीघा सेतु के मुहाने की तरफ से पहला गांव गंगाजल है। वहां के लोगों ने सड़क बनाने के लिए लीज पर जमीन देने की सहमति दे दी है। शनिवार को चौसिया के ग्रामीणों से सहमति लेने की बारी थी। अगले कुछ दिनों में भरपुरा और सुलतानपुर के ग्रामीणों से भी सहमति लेने की कोशिश की जाएगी।
एकमत के लिए मांगा समय
चौसिया के विकास कुमार, रमेश प्रसाद यादव, अवध किशोर चौरसिया, विश्वनाथ राय, जवाहर प्रसाद चौरसिया, रामचंद्रजी, प्रखंड प्रमुख के प्रतिनिधि शिव नारायण मंडल समेत अन्य कई ग्रामीणों की जमीन की कीमत पर राय अलग-अलग थी। कोई प्रति कट्‌ठे 5 लाख रुपए मांग रहा है तो कोई जमीन के वर्तमान बाजार मूल्य की चौगुनी राशि। किसी की मांग थी कि सरकारी रेट नहीं बाजार मूल्य का सर्वे कर जमीन का दाम तय हो। इस पर प्रखंड प्रमुख के प्रतिनिधि शिव नारायण मंडल ने कहा कि कुछ दिनों का समय दिया जाए, गांव के लोग एकमत होकर सरकार से फिर बात करेंगे।
बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के भू अर्जन अनुश्रवण पदाधिकारी अर्जुन प्रसाद और सोनपुर अनुमंडल के एसडीओ मदन कुमार ने ग्रामीणों को बताया कि बिहार रैयती भूमि लीज नीति 2014 में ग्रामीणों की सहूलियत तय की गई है। ग्रामीणों और सरकार के बीच सहमति का एग्रीमेंट बनेगा। गइस ‘सतत लीज’ एग्रीमेंट के बाद जमीन का मालिकाना हक सरकार को होगा। पैसे के वितरण में देर नहीं होगी। ग्रामीणों के दरवाजे पर सरकार के अधिकारी सारे मामले का निपटारा कैंप लगाकर करेंगे और पूरी राशि का चेक एक साथ हाथों में सौंपेंगे।

चौसिया गांव पहुंचे ये अधिकारी : राज्य सरकार के अधिकारी शनिवार को लाव लश्कर के साथ चौसिया गांव पहुंचे थे। सोनपुर एसडीओ, डीसीएलआर, अंचलाधिकारी और सर्किल इंस्पेक्टर के साथ पुल निर्माण निगम के भू अर्जन अनुश्रवण पदाधिकारी, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर, एप्रोच रोड के लिए तैनात प्रोजेक्ट इंजीनियर और कई अन्य अधिकारी ग्रामीणों के दरवाजे पर थे।।

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