पटना. मछली उत्पादन और बिक्री बढ़ाने के लिए राज्य में फिश फेडरेशन बनेगा। सरकारी स्तर पर बनने वाले इस फेडरेशन में विभागीय अधिकारियों की टीम के साथ बाहर से भी लोग होंगे। फेडरेशन के माध्यम से सरकारी तालाबों में मछली बीज उत्पादन कराया जाएगा। दूसरे राज्यों से भी बीज लाकर किसानों को सस्ती दर पर उपलब्ध कराया जाएगा।
किसानों (मछलीपालक) से उत्पादित मछली की बिक्री की भी व्यवस्था होगी। फेडरेशन के गठन के लिए पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने रूपरेखा तैयार कर ली है। इस वर्ष के अंत तक इसका गठन हो जाएगा।
विभागीय सचिव होंगे मुख्य अधिकारी
फेडरेशन उपभोक्ताओं और मछली उत्पादकों के बीच लिंक का भी काम करेगा। यह कृषि विभाग के बीज निगम की तरह मछली बीज निगम का भी काम करेगा। विभागीय सचिव फेडरेशन के मुख्य अधिकारी होंगे। इनकी अध्यक्षता में ही एक कमेटी होगी, जिसमें मत्स्य निदेशक सहित अन्य अधिकारी और मछली उत्पादन से जुड़े विशेषज्ञ होंगे। अगल-अलग प्रोजेक्ट के लिए प्रोजेक्ट मैनेजर बहाल होंगे।
फिश फेडरेशन की जिम्मेदारी होगी कि हर जिले में मछली बिक्री केंद्र के साथ ही प्रखंड स्तर पर बिक्री केंद्र की स्थापना कराए। मिट्टी और जल के आधार पर जिस मछली का उत्पादन अधिक हो सकता है, उसका बीज किसानों को उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी फेडरेशन करेगा। फेडरेशन मछली बीज के साथ ही मछलियों का खाना (फिश फीड) भी किसानों को सस्ती दर पर उपलब्ध कराएगा।
रोजगार बढ़ेगा
फेडरेशन खुद कुछ चुने हुए सरकारी तालाबों में हैचरी बना कर बीज तैयार कराएगा। फेडरेशन की स्थापना होने से फिशरीज कोर्स करने वालों छात्रों को जहां रोजगार की संभावना बढ़ेगी। वहीं राज्य से लेकर प्रखंड तक बेरोजगार युवक मछली बिक्री केंद्रों से जुड़ कर रोजगार पा सकेंगे। पिछले दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विभागीय समीक्षा बैठक में फिश फेडरेशन बनाने का निर्देश दिया था। इसके बाद विभाग ने इस दिशा में कार्रवाई करते हुए प्रारंभिक स्तर पर फेडरेशन की रूपरेखा तैयार की है।
फेडरेशन का काम
- सरकारी तालाबों में हैचरी बना कर बीज उत्पादन
- किसानों को सस्ती दर पर बीज उपलब्ध कराना
- जिलों व प्रखंडों में मछली बिक्री केंद्र स्थापित कराना
- किसानों को मछली की बेहतर कीमत दिलवाना
- मछलियों का खाना भी सस्ती दर पर उपलब्ध कराना
- मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार को रिपोर्ट देना
मत्स्य निदेशक निशात अहमद ने बताया कि बिहार में फिश फेडरेशन बनेगा। बीज निगम की तरह यह फेडरेशन काम करेगा। मत्स्य बीज उत्पादन से लेकर दूसरे प्रदेशों से बीज मंगवा कर मछली उत्पादक किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। संभावना है कि इस साल के अंत तक फेडरेशन का गठन हो जाएगा। किसानों से उत्पादित मछली की बिक्री की भी फेडरेशन व्यवस्था कराएगा। मछली उत्पादन और बिक्री बढ़ाने में इसकी बड़ी भूमिका होगी।
मछली उत्पादन का हाल
| वर्ष | उत्पादन | जरूरत |
| 2010-11 | 2.5 | 4.25 |
| 2011-12 | 2.75 | 4.50 |
| 2012-13 | 3.50 | 5 |
| 2013-14 | 4.32 | 5.81 |
| 2014-15 | 4.70 | 6.00 |
(आंकड़ा लाख टन में)
| राज्य में तालाब | 93 हजार हेक्टेयर |
| आर्द्र जलक्षेत्र | 9.41 लाख हेक्टेयर |
| जलाशय का क्षेत्र | 25 हजार हेक्टेयर |
| वन का क्षेत्र | 9 हजार हेक्टेयर |
| नदियों का क्षेत्र | 3200 किमी |
| मछली का आयात | 1.50 लाख टन |
| राज्य में हैचरी | 112 |
| प्रति व्यक्ति मछली उपलब्धता का राष्ट्रीय औसत | 8.54 किलो |
| राज्य में मछली उपलब्धता प्रति व्यक्ति | 7.7 किलो |