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खुदीराम बोस शहादत दिवस : शहादत के बाद युवा पहनने लगे थे खुदीराम बोस लिखी धोती

4 वर्ष पहले
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मुजफ्फरपुर. वर्ष 1857 में मंगल पांडेय द्वारा शुरू किए सिपाही विद्रोह को अंग्रेजों द्वारा दबा दिए जाने के बाद करीब 50 वर्षों तक देश में कोई जोरदार विरोध का स्वर सुनाई नहीं पड़ा। इस घोर सन्नाटे को तोड़ा खुदीराम बोस व प्रफुल्ल चंद्र चाकी ने। दोनों वीर सपूतों ने अंग्रेजी सरकार काे चुनौती देते हुए 30 अप्रैल 1908 को मुजफ्फरपुर क्लब के सामने बम विस्फोट किया।
 
यह विस्फोट दमनकारी जज किंग्सफोर्ड को मौत के घाट उतारने के लिए किया गया था। लेकिन, होनी को कुछ और ही मंजूर था। वह बम किंग्सफोर्ड को नहीं लग कर एक अंग्रेज वकील की बेटी व पत्नी को लगा। बम विस्फोट की इस घटना से अंग्रेजी सरकार हिल गई थी। अंग्रेजों को देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया। बम विस्फोट के लिए अंग्रेजों ने खुदीराम बोस पर केस चलाया और 11 अगस्त 1908 को तड़के सेंट्रल जेल में उन्हें फांसी दे दी। गौरतलब है कि खुदीराम बोस का जन्म 3 दिसंबर 1889 को हुआ था। 
 
युवाओं के लिए अनुकरणीय बन गए थे खुदीराम बोस 

खुदीराम बोस की शहादत के बाद देश में देशभक्ति की  लहर उमड़ पड़ी। इसका प्रभाव यह हुआ कि बिहार-बंगाल के युवा व छात्र वही धोती पहनने लगे, जिस पर खुदीराम बोस  लिखी होती थी। प्रसिद्ध साहित्यकार शिरोल ने अपनी पुस्तक खुदीराम की जीवनी में लिखा है कि शहादत के बाद खुदीराम बोस युवाओं के लिए अनुकरणीय हो गए थे। कई दिनों तक स्कूल-कॉलेज बंद रहे। चारों ओर शोक व्याप्त हो गया। इसके बाद  हर युवा अपने को खुदीराम बोस समझने लगा। युवा वही धोती पहनने लगे, जिसके किनारे पर बोस का नाम लिखा होता था। धोती की मांग बढ़ने  पर बंगाल में खुदीराम बोस लिखी धोती ही बिकने लगी।
 
जेल में फांसी स्थल पर दी गई श्रद्धांजलि 
 
शहादत दिवस पर गुरुवार की देर रात सेंट्रल जेल स्थित फांसी स्थल पर बोस को श्रद्धांजलि दी गई। इसमें पुलिस व प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि व शहर के गणमान्य लोग शामिल हुए। 
 
मुजफ्फरपुर स्टेशन का नाम खुदीराम नगर करने की मांग 
 
नागरिक मोर्चा ने मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन का नाम खुदीराम नगर व मोकामा स्टेशन का नाम शहीद प्रफुल्ल चंद चाकी के नाम पर करने की मांग की। इसको लेकर मोर्चा की अगुवाई में शुक्रवार को स्टेशन परिसर में सत्याग्रह किया जाएगा। स्मारक स्थल पर गुरुवार को माेर्चा की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
 
श्रद्धांजलि देने पहुंचे बोस के चार परिजन

गुरुवार की शाम पं. बंगाल के मिदनापुर से बोस के चार परिजन भी श्रद्धांजलि देने के लिए शहर पहुंचे। शाम में जिला प्रशासन के अधिकारी व जेल अधीक्षक से भेंट कर उन्होंने आने की जानकारी दी। बाद में प्रकाश हलधर, रविशंकर महतो, संतोष गोडाइत और अनिरुद्ध हलधर ने भी देर रात फांसी स्थल पर पहुंच कर श्रद्धासुमन चढ़ाए।


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