नई दिल्ली/पटना. यूपी में जदयू की दिलचस्पी बेवजह नहीं है। भाजपा, सपा और बसपा को छोड़ कांग्रेस सहित आठ दल ऐसे हैं, जिन्हें 2012 के विधानसभा चुनाव में 18.14 फीसदी वाेट मिला था। अगर इसमें निर्दलीयों को मिले वोटों को जोड़ दें तो यह आंकड़ा 22.27 फीसदी पर पहुंच जाता है। इन वोटों की गोलबंदी भाजपा, सपा और बसपा के विरोध के नाम पर होने की उम्मीद है। यही आंकड़ा और समीकरण नीतीश कुमार की हिम्मत बढ़ा रहा है।
यूपी में तीन विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव हो रहे हैं। परिणाम इसी महीने की 16 तारीख को आएंगे। इस आधार पर भी जदयू अपनी रणनीति में सुधार करेगा। पिछले चुनाव में इन तीनों सीटों-मुजफ्फरनगर , बीकापुर और देवबंद में सपा की जीत हुई थी। हालांकि, उपचुनाव में इन सीटों पर कांग्रेस के साथ रालोद के उम्मीदवार भी खड़े हैं। जदयू ने रालोद का समर्थन किया है।
इतना तय है कि यूपी में बिहार की तरह सिर्फ भाजपा विरोध के नाम पर गोलबंदी नहीं होगी। वहां सपा, बसपा और भाजपा के समर्थन और विरोध में तीन केंद्र बनेंगे। कांग्रेस, जदयू और दूसरे छोटे दल चौथा केंद्र बनाएंगे। खास बात यह है कि यह चौथा केंद्र भाजपा और सपा के प्रति तो हमलावर रहेगा, लेकिन, बसपा के साथ नरम रुख रखेगा। इसलिए कि परिणाम आने के बाद अगर मिली-जुली सरकार की संभावना बनती है तो बसपा के साथ चलने की गुंजाइश बनी रहे।
2012 में 3.22% वोट के अंतर से जीती थी सपा
अगर, 2012 के यूपी विधानसभा के परिणाम पर गौर करें तो कम वोट फीसदी के अंतर से ही सपा पूर्ण बहुमत में आ गई थी। बसपा के मुकाबले सपा को सिर्फ 3.22 फीसदी अधिक वोट मिले थे। वोटों के इस अंतर से ही सपा को 224 सीटों पर कामयाबी मिल गई, जबकि बसपा 80 सीटों पर सिमट गई। 2014 के लोकसभा चुनाव में 42.30 फीसदी वोट हासिल करने वाली भाजपा तक 47 सीट और 15 फीसद वोट पर ठिठक गई। यह मानी हुई बात है कि अपवादों को छोड़ दें तो लोकसभा चुनाव के परिणाम विधानसभा में नहीं दोहराए जाते। अभी हाल में बिहार में भी ऐसा ही हुआ।
ओवैसी भी हुए सक्रिय
जदयू की कोशिश से बनने जा रहे गठबंधन में मुस्लिम वोटों को एकजुट करने की योजना भी है। इसके लिए पीस पार्टी को जोड़ा जा रहा है। पिछले चुनाव में पीस पार्टी के 208 उम्मीदवार थे। चार पर जीत हुई। उसे कुल वोटों में 2.35 और लड़ी गई सीटों पर 4.54 फीसदी वोट मिला। प्रस्तावित गठबंधन की एक और पार्टी अपना दल जिन 76 सीटों पर लड़ा था, उसे 4.86 फीसद वोट मिला था। कुल वोटों में उसकी हिस्सेदारी 0.90 फीसदी थी। हालांकि, बिहार में चोट खाने के बावजूद एमआइएम के मौलाना असदुद्दीन ओवैसी यूपी में सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने उपचुनाव में भी अपना उम्मीदवार खड़ा किया है।
2014 के चुनाव में कुल वोटों में हिस्सेदारी
कांग्रेस 11.65
भाकपा 0.13
एनसीपी 0.33
माकपा 0.09
रालोद 2.33
जदयू 0.36
पीस पार्टी 2.35
अपना दल 0.90