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पंचायतों और स्थानीय निकायों को मिलेगी और अधिक राशि, आयोग ने सौंपी रिपोर्ट

5 वर्ष पहले
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पटना. पंचम राज्य वित्त आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। आयोग ने शुद्ध आंतरिक राजस्व में पंचायती राज संस्थान और स्थानीय निकायों को 8.5 फीसदी हिस्सेदारी देने की सिफारिश की है। उम्मीद है कि 2016-17 के बजट में पंचम वित्त आयोग की सिफारिश को लागू किया जाएगा और पंचायत और स्थानीय निकायों को और अधिक राशि योजना के लिए उपलब्ध हो सकेगी।

अभी तक चतुर्थ वित्त आयोग की अनुशंसा के आधार पर ही राज्य के राजस्व में पंचायती राज संस्थान और स्थानीय निकायों को राज्य के राजस्व में 7.5 फीसदी हिस्सेदारी दी जा रही थी। चतुर्थ वित्त आयोग की अनुशंसा की अवधि 31 मार्च, 2014 को ही खत्म हो गई थी। राज्य पंचम वित्त आयोग का गठन दिसंबर, 2013 में किया गया था। इसके अध्यक्ष सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी एनएपी सिन्हा को बनाया गया था। आयोग को अपनी रिपोर्ट 31 मार्च, 2014 से पहले देनी थी, लेकिन तकरीबन दो साल बाद दी है।

अभी कितनी मिल रही राशि

पिछले वित्तीय वर्ष के आधार पर गणना करें तो पंचायती राज संस्थान और स्थानीय निकायों को राज्य के राजस्व में से तकरीबन 1700 करोड़ रुपए की हिस्सेदारी मिली है। पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार को 22663 करोड़ की राशि प्राप्त हुई थी। अगर पंचम वित्त आयोग की अनुशंसा के आधार पर गणना की जाए तो इन संस्थानों को 1926 करोड़ की राशि मिलेगी यानी 226 करोड़ अधिक राशि मिलेगी।
नगर निकायों के आय-व्यय पर नजर रखेगी नगरपालिका लेखा समिति

पटना। नगर विकास विभाग ने आय-व्यय पर नजर रखने के लिए सभी नगर निकायों को नगरपालिका लेखा समिति के गठन का निर्देश दिया है। विभाग के प्रधान सचिव ने सभी नगर निगमों के आयुक्तों और नगर परिषद व नगर पंचायतों के कार्यपालक पदाधिकारियों को जल्द से जल्द इसके गठन का आदेश दिया है। इस समिति के गठन के लिए राज्य सरकार ने 2013 में निर्देश जारी किए थे, लेकिन अभी तक इसका गठन नहीं हुआ। सभी नगर निगमों के लिए समिति के सदस्यों की संख्या नौ निर्धारित की गई है, जबकि नगर परिषदों में पांच और नगर पंचायतों में तीन सदस्य होंगे।
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