बेतिया. मन में विश्वास व दिल में जुनून हो तो कोई भी अभाव सफलता में बाधक नहीं बन सकता। अंडर 14 में भारतीय महिला फुटबॉल टीम की कप्तान सोनी कुमारी खुद कामयाब होने के बाद गांव की लड़कियों को भी फुटबॉल की बारीकियां सीखा रही है और उन्हें ऊंचाईयों पर ले जाने की तमन्ना रखती है। खाने का नहीं था ठिकाना, जूते कहां से लाती...
प्रकाशनगर में रहने वाली पन्नालाल पासवान और बबीता देवी की दूसरी बेटी सोनी बताती है कि 2010 में जब छात्र मैदान में खेल का प्रशिक्षण ले रहे होते थे तो उसे भी खेलने की इच्छा होती थी। लेकिन, घर में खाने का ठिकाना नहीं, तो ड्रेस व जूते कहां से लाती। इसलिए मैदान के किनारे खड़े होकर एकटक उन्हें निहारती। एक दिन जब कोच ने पूछा कि तुम भी खेलोगी? तो ऐसा लगा कि अब उसके सपने सच होने वाले हैं और उसने फौरन हामी भर दी।
पिता नेपाल में चलाते थे तांगा
उनके पिता पन्नालाल पासवान नेपाल के चितवन में तांगा चलाते थे। लेकिन अब वे घर पर ही रहते हैं। सोनी अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने कोच सुनील वर्मा को देती हैं। उन्होंने बताया कि 2013 में मेरा पासपोर्ट नहीं बन पा रहा था। मुझसे कहा गया कि पासपोर्ट नहीं आया तो वे देश के बाहर होने वाले टूर्नामेंट्स में शामिल नहीं हो पाएंगी। ऐसे में उनके कोच ने पासपोर्ट का इंतजाम किया। सोनी कहती है कि मैं जब भी खेलती हूं पूरे जोश व जुनून के साथ खेलती हूं।
2012 में कप्तानी, 2015 में बांग्लादेश को हराया
2012 में अंडर 14 में भारतीय महिला फुटबॉल की कप्तान चुनी गई। कटक, पश्चिम बंगाल, पंजाब, तमिलनाडु के अलावा अन्य राज्यों में खेल चुकी है। 2015 में काठमांडू में बांग्लादेश को हराया था।
मेसी हैं पसंदीदा फुटबॉलर
अर्जेंटीना के स्टार स्ट्राइकर लिओनेल मेसी सोनी को सबसे ज्यादा पसंद हैं। साथ ही रोनाल्डो भी सोनी के पसंदीदा खिलाड़ी हैं।
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