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41 साल बाद भी मॉडल नहीं बन पाया राजकीय महिला कॉलेज

6 वर्ष पहले
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अनुपम कुमार > पटना 9334940256

1974मेंशिक्षा विभाग के द्वारा गर्दनीबाग में राजकीय महिला महाविद्यालय की स्थापना की गई। इसे मॉडल कॉलेज का रूप दिया जाना था। कॉलेज की स्थापना का उद्देश्य महिला शिक्षा को बढ़ावा देना और कम से कम फीस में राजधानी की लड़कियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाना था ताकि समाज के कमजोर वर्ग की छात्राएं भी उसका लाभ ले सकें। लेकिन, स्थापना के 41 साल बाद भी कॉलेज स्कूल की जमीन पर है। सुविधाओं की कमी है। यह तो मॉडल कॉलेज नहीं बन पाया है और ही अपने स्थापना के उद्देश्यों को पूरा कर पाया है।

घोषणाके बाद भी अब तक नहीं मिली जमीन

राजकीयमहिला महाविद्यालय अपनी जमीन पर नहीं है। स्थापना के समय कॉलेज अनीसा बेगम की हवेली में चलता था। 1990 में हवेली के उत्तराधिकारियों से विवाद और मुकदमा हारने के बाद यह राजकीय कन्या विद्यालय गर्दनीबाग के परिसर में स्थानांतरित किया गया।

प्रारंभ में कॉलेज स्कूल भवन के ऊपरी कमरों में चलता था। एक माध्यमिक विद्यालय भी इसी परिसर में है। एक परिसर में दो स्कूल और एक कॉलेज होने के कारण जगह की किल्लत थी। कॉलेज को एकाकी माहौल उपलब्ध नहीं था। इसलिए राजद सरकार के तत्कालीन शिक्षा मंत्री ने कॉलेज को अपनी भूमि दिलवाने की घोषणा की। इसके लिए बगल में स्थित टूटे सरकारी क्वार्टर की जमीन आवंटित करने की फाइल बढ़ाई गई, लेकिन उच्चाधिकारियों तक पहुंचने के बाद फाइल कहीं दब गई जो आज तक दबी है। उस जमीन पर कुछ बना भी नहीं। 2002 में स्कूल के मैदान के एक कोने में ही काॅलेज का नया भवन बनना शुरू हुआ। इसका एक ब्लॉक बन कर पूरा हो चुका है और एक नया ब्लॉक बन रहा है।

निर्माण कार्य के कारण छात्राओं की परेशानी बढ़ गई है। उनके काॅमन रूम में निर्माण कार्य में लगे मजदूर सो रहे हैं और निर्माण सामग्रियों के बिखरे होने के कारण मैदान भी अब उठने-बैठने लायक नहीं रहा। इसका आकार घट कर बहुत छोटा रह गया है और यह खेदकूद प्रतियोगिता के आयोजन के लिए बिल्कुल ही उपयुक्त नहीं रहा।

फी स्ट्रक्चर सबसे कम

राजधानी के अन्य कालेजों की तुलना में फी स्ट्रक्चर सबसे कम है। महीने में 11 से 15 रुपए के बीच फी है। वोकेशनल कोर्स की फी भी काफी कम है। यही कारण है कि सुविधाओं की कमी के बावजूद छात्राओं की संख्या बहुत अधिक है। रिजल्ट भी बेहतर है।

कॉलेज में शिक्षकों की कमी है। यहां 49 पद स्वीकृत हैं जबकि सिर्फ 25 शिक्षक ही कार्यरत हैं। कॉलेज में छात्राओं की संख्या 2200 है। यूजीसी मानक के अनुसार यहां कम से कम 88 शिक्षक होने चाहिए। शिक्षकों की कमी का कारण 12 वर्षों से नियुक्ति नहीं होना है। अंतिम नियुक्ति 2003 में बीपीएससी से हुई थी। उसके बाद कई शिक्षक सेवानिवृत हुए हैं, लेकिन नई नियुक्ति नहीं हुई है। इसके कारण शिक्षक-छात्र अनुपात बढ़ कर 1:25 की जगह 1:88 है। गैर शैक्षणिक संवर्ग में भी कर्मियों की कमी है और 50 में 17 पद खाली हैं।

कॉमन रूम में सो रहे मजदूर

शिक्षकों की कमी

राजकीय महिला महाविद्यालय गर्दनीबाग की प्राचार्य नूतन सहाय से सीधी बात

समस्याएंहैं, लेकिन स्थिति में सुधार हो रहा

शिक्षकों की संख्या जरूरत से काफी कम है?

इससेअसुविधा होती है, वर्कलोड बढ़ गया है। इसके बावजूद हमारी कोशिश रहती है कि अधिक से अधिक कक्षाओं का संचालन हो।

आधारभूतसंरचना की कमी है। क्या इससे परेशानी नहीं होती?

कुछसमस्याएं हैं, लेकिन पहले की तुलना में स्थिति में सुधार हो रहा है। कॉलेज भवन का एक नया ब्लॉक बन रहा है। उसके बाद हमारी स्थिति और सुधरेगी।

कॉलेजको मॉडल कॉलेज बनाना था। क्या यह अपना उद्देश्य पूरा कर पाया है?

सीमितसंसाधन के बावजूद हम अपनी तरफ से पूरा प्रयास कर रहे हैं। पढ़ाई के साथ साथ हम एक्सट्रा करिकुलर एक्टिविटी पर भी जोर देते हैं।

राजद सरकार में शिक्षा मंत्री की घोषणा के बाद भी नहीं मिली जमीन, स्कूल कैंपस में चल रहा गर्दनीबाग कॉलेज

परेशानी