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... खुदा की जात पर कितना भरोसा है परिंदों को

6 वर्ष पहले
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यहीतोहोता है शीशे के कारोबार का हश्र, उजड़ गया है अचानक हरा भरा बाजार... कौश सिद्दिकी के इस शेर पर शनिवार की शाम हज भवन के ऑडिटोरियम में बैठे श्रोता वाह-वाह कर उठे। मौका था ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ मुस्लिम डॉक्टर्स की ओर से यहां आयोजित मुशायरे का, जिसमें राज्य के कोने-कोने से आए शायरों ने अपने कलाम से श्रोताओं का दिल जीत लिया।

मुशायरे का आगाज शंकर कैमूरी के शेरों से हुआ। उन्होंने तेरे रहमतों का दरिया सरेआम चल रहा है... जो बीमारे मुहब्बत हैं वह दवाखाना नहीं रखते... खुदा की जात पर कितना भरोसा है परिंदों को.... सुना कर महफिल में समां बांध दिया। वहीं, कार्यक्रम में शायर नाशाद औरंगाबादी ने, बरसती है लानत खुदा की रोज शब, बड़े बुजर्गों का जिस घर में एहतराम नहीं होता, सुना कर खूब तालियां बटोरी।

इस दौरान कैसर सिद्दिकी, नवाब हसन नवाब, अली अहमद मंजर, असद रिजवी, हसन वस्तवी, आमिर नजर, डॉ. नसर आलम नसर, मीर सज्जाद, चोंच गयावी, आसिफ आरवी, इसरार जामई समेत कई शायरों ने अपनी शायरी से मुशायरे को यादगार बना दिया। कार्यक्रम में ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ मुस्लिम डॉक्टर्स के मुख्य संरक्षक डॉ. एए हई, अध्यक्ष डॉ. खुर्शीद आलम, सचिव डॉ. सैयद नजीर हुसैन, कोषाध्यक्ष डॉ. अथर अंसारी, कार्यक्रम आयोजन सचिव डॉ. एमजे रई, सदस्य डॉ. मनव्वर अहसन समेत बड़ी संख्या में डॉक्टर और शहर के बुद्धिजीवी मौजूद थे।

हज भवन में मुशायरा में शेर पढ़ते फरदुल हसन। मुशायरा में उपस्थित डॉ. एजाज अली अरशद, डॉ. एए हई, शफी मशहदी (बाएं से)।

mushaira