नाटक ने दिया बेटियों को बचाने का संदेश
बेटीनहींबचाओगे तो मां कहां से पाओगे... इन पंक्तियों के माध्यम से शनिवार की शाम कालिदास रंगालय में कन्या भ्रूण हत्या रोकने की अपील की गई। यहां जयवर्धन लिखित और गुप्तेश्वर कुमार निर्देशित नाटक किस्सा मौजपुर का, मंचन किया गया। इस नाटक को बिहार आर्ट थियेटर के बैनर तले प्रस्तुत किया गया था।
नाटक में समाज में तेजी से बढ़ती कन्या भ्रूण हत्या के दुष्परिणामों को दिखाया गया। अगर गर्भ में ही बेटियों को मारे जाने का यहीं सिलसिला चलता रहा तो एक दिन ऐसा आएगा कि लड़कों की शादी होनी तक मुश्किल हो जाएंगी। समाज का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। विज्ञान ने गर्भ में ही लिंग के जांच की सुविधा दे दी, लेकिन यह सुविधा आज हमारे लिए एक अभिशाप बन चुकी है। इस तकनीक ने बेटियों के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा कर दिया है और स्त्री पुरुष लिंगानुपात बिगड़ चुका है। नाटक सवाल करता है कि आखिर क्यों गर्भ में ही मां-बाप बच्ची की हत्या करवाते हैं। वह डॉक्टर जो इस घिनौने काम को अंजाम देता है क्या उसका दिल नहीं पसीजता एक अजन्मी बच्ची की हत्या करते हुए। वह क्यों नहीं सोचता कि उसे जन्म देने वाली भी कोई स्त्री ही है। वह हर वर्ष जिस बहन से राखी बंधवाता है वह भी एक स्त्री है, फिर भी उसका दिल क्यों नहीं पिघलता? नाटक यह संदेश देता है कि मानवता को बचाना है तो बेटियों को बचाना होगा।
फोटोपत्रकार कृष्ण मुरारी किशन को दी गई श्रद्धांजलि
कार्यक्रममें बिहार आर्ट थियेटर की ओर से शहर के रंगकर्मियों ने दिवंगत वरिष्ठ फोटो पत्रकार कृष्ण मुरारी किशन को श्रृद्धांजलि दी। रंगकर्मियों ने उनसे जुड़े संस्करण सुना कर उनकी यादों को ताजा किया। इस दौरान गुप्तेश्वर कुमार, प्रदीप गांगुली, अशोक घोष, समेत बड़ी संख्या में रंगकर्मी मौजूद थे।
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यह थे कलाकार
पीयूष कुमार, प्रवीण कुमार, कुणाल कौशल, दीपक कुमार, रानू बाबू, रणविजय सिंह, कृति ज्योत्सना शर्मा, उमेश कुमार, पुष्पा कुमारी, धीरज कुमार, अजित कुमार, रविभूषण भट्ट, नीतीश कुमार, डॉ शंकर सुमन, दीपक मिश्रा, विश्वजीत कुमार, उज्जवला गांगुली, पीयूष कुमार, दीपक कुमार, एस कृष्णन(नायडू) चक्रपाणि पांडेय आदि।
निर्देशक- गुप्तेश्वरकुमार
परिकल्पनाएवं मंच व्यवस्था- प्रदीपगांगुली
प्रकाशसंयोजन - अशोकघोष और राजकुमार शर्मा