हर गांव का अपना मास्टर प्लान होगा
राज्य के सभी गांवों का अपना मास्टर प्लान होगा। इसमें उनके विकास की विस्तृत कार्ययोजना होगी। नागरिक सुविधाओं के साथ सड़क, सीवरेज, ड्रेनेज पेयजल से जुड़ी तमाम योजनाएं शामिल होंगी। विकास का मॉडल शहरों की विकास योजनाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। सरकार शहरों के विकास में रही बाधाओं को देखकर ही गांवों के विकास की योजना बनाने की निर्णय लिया है।
केंद्र ने इस योजना के लिए पूरे देश के 2500 अति पिछड़े प्रखंडों का चयन किया है। इस योजना में बिहार के 320 प्रखंडों का चयन किया गया था, लेकिन राज्य सरकार ने इसे सभी प्रखंडों में लागू करने का निर्णय लिया है। योजना बनाने के लिए गांवों में वहां के लोगों की सामाजिक-आर्थिक जरूरतों को आधार बनाया जाएगा और मनरेगा के जरिए उन्हें पूरा किया जाएगा। केंद्र सरकार के निर्देश पर मनरेगा के तहत गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए यह सारी कवायद की जा रही है।
^गांवों का मास्टर प्लान तैयार होने के बाद योजनाओं की स्वीकृति और क्रियान्वयन में तेजी और एकरुपता आएगी। इसके तहत गांवों के संसाधनों और जरूरतों का एक डाटाबेस तैयार होगा, जिसका इस्तेमाल भविष्य में किया जा सकेगा। नीतीशमिश्रा, ग्रामीणविकास मंत्री
डेढ़ माह में जुटाए जाएंगे आंकड़े
आंकड़ाजुटाने का काम डेढ़ महीने में पूरा किया जाना है। इसके लिए सरकार ने 22 सितंबर को राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया है। इसमें सभी जिलों के डीडीसी, बीडीओ, पीओ, कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता, जेई, जीविका और स्वयं सहायता समूहों के प्रतिनिधि, पैक्स के प्रतिनिधि और पीएमआरडीएफ (प्राइम मिनिस्टर रुरल डेवलपमेंट फेलो) हिस्सा लेंगे।
पहले चरण में आंकड़े जुटाने के लिए सभी गांवों में वार्ड के स्तर पर सोशल मैपिंग, डोर टू डोर सर्वे, संसाधन मैपिंग, सीजन मैपिंग और लाइवलीहुड मैपिंग की जाएगी। इसके तहत गांवों की सामाजिक-आर्थिक संरचना और लोगों की जरूरतों का आकलन किया जाएगा। आवश्यकता के अनुसार सभी पंचायतों का मनरेगा का लेबर बजट तैयार होगा। इसके आधार पर हर वार्ड का नजरी नक्शा तैयार होगा और काम चिह्नित किया जाएगा। पंचायत स्तर पर कार्य की सूची तैयार कर ग्राम सभा से स्वीकृति ली जाएगी।
मनरेगाकी सभी 30 योजनाओं की होगी मैपिंग : यहयोजना के तहत मनरेगा के लिए निर्धारित सभी 30 तरह के कार्यों की मैपिंग की जाएगी। इसमें जल सं