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वित्तरहित हाई स्कूलों को अनुदान माह के अंत तक
विप में वित्तरहित शिक्षण संस्थाअों की समस्याओं पर 18 को बैठक
विधानमंडल का 19 दिसंबर से शुरू हो रहे शरदकालीन सत्र में भी वित्तरहित स्कूल-कॉलेजों के लंबित अनुदान नियोजित शिक्षकाें का मानदेय बढ़ाने की गूंज रहेगी। परिषद के पिछले सत्र में भी यह मुद्दा उठने पर सभापति अवधेश नारायण सिंह ने अगस्त में शिक्षा मंत्री वृशिण पटेल के साथ बैठक की थी। इसी मसले पर सभापति ने 18 दिसंबर को फिर बैठक बुलाई है। इस बैठक में परिषद के शिक्षक प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है।
सभापति ने गुुरुवार को यहां दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि वित्तरहित स्कूल-कॉलेजों के लंबित अनुदान के भुगतान और नियोजित शिक्षकों की समस्याओं लेकर सरकार गंभीर है। शिक्षा मंत्री ने पिछली बैठक में भरोसा दिलाया था कि संसाधन की उपलब्धता के मद्देनजर सरकार हरसंभव मदद करेगी। नियोजित शिक्षकों की सेवा शर्त में सुधार सहित मानदेय भी बढ़ेगा। उन्हें उम्मीद है कि सरकार शिक्षक-कर्मियों के हित मेें निर्णय लेगी।
नएसाल में मिलेगा तोहफा!
इधर,जानकारों का मानना है कि वर्ष 2015 विधानसभा का चुनावी वर्ष होने के मद्देनजर सरकार वित्तरहित स्कूल-कॉलेजों के साथ नियोजित शिक्षकों के संबंध में नए वर्ष में घोषणा करेगी और तोहफा देगी। मालूम हो कि नीतीश सरकार ने वर्ष 2008-09 में वित्तरहित शिक्षा नीति समाप्त कर संबंधित स्कूल-कॉलेजों को उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं की संख्या और श्रेणी के आधार पर अनुदान देने की योजना शुरू की थी। दो शैक्षणिक सत्रों 2008 और 2009 के लिए अनुदान बंटे। 2010 के अनुदान की प्रक्रिया चल रही है।
लोकसभा के चुनाव के पहले नियोजित शिक्षकों का एकमुश्त तीन-तीन हजार नियत वेतनवृद्धि का तोहफा मिला था। इसके बाद से नियत वेतन बढ़ाने की मांग होती रही है। राज्य में वित्तरहित 1200 हाई स्कूल इंटर कॉलेज और 225 संबद्ध डिग्री कॉलेजों में कुल 50 हजार से अधिक शिक्षक-कर्मचारी हैं। राज्य में 3.50 लाख से अधिक नियोजित शिक्षक हैं।
{वित्तरहित स्कूल-कॉलेजों का लंबित अनुदान और नियोजित शिक्षकाें का मानदेय बढ़ाने की मांग और प्रस्ताव पर होगी बैठक
{शिक्षा मंत्री वृशिण पटेल और कर्मचारी महासंघ के बीच हुई वार्ता