मुखबिर ने की आत्मदाह की कोशिश, गिरफ्तार
पटना. माओवादी से मुखबिर बने मो.असलम ने पुलिस की वादा खिलाफी से तंग आकर शनिवार को करगिल चौक पर आत्मदाह की कोशिश की। शरीर पर केरोसिन डालते समय पुलिस ने उसे दबोच लिया। बाद में वह एक पेड़ पर चढ़ गया। जहां से उतार कर गिरफ्तार करने के बाद गांधी मैदान थाने लाया गया। वहां से जमानत पर छोड़ दिया गया।
मो. असलम छपरा के मकेर का रहनेवाला है। वह अभी बुद्धा कॉलोनी में रहता है। प|ी फैजाना खातून और बेटे साजिद के साथ सुबह ही करगिल चौक आया था। पुलिस-प्रशासन को उसने पहले से आत्मदाह की चेतावनी दी थी। बकौल असलम- मुखबिरी के एवज में 15 लाख रुपए, बिहार के बाहर एक घर तथा जेल नहीं भेजने की मांग की थी। जिसे तत्कालीन सारण एसपी एके सत्यार्थी ने माना था। उसकी सूचनाओं पर कई माओवादी गिरफ्तार हुए, भारी मात्रा में असलहा बरामद किया गया। लेकिन वादे के अनुसार उसे ना तो पूरे रुपए मिले ना ही घर। अब माओवादी उसे मारने की नीयत से खोज रहे हैं।
बकौल असलम- 2010 में वह भाकपा(माओवादी) से जुड़ा। उस समय सरकार ने माओवादियों के लिए सरेंडर पॉलिसी घोषित की थी। तत्कालीन एसपी एके सत्यार्थी के कहने पर 5 मार्च 2011 को वह दोबारा संगठन में शामिल हुआ। 29 मार्च 2011 कोे उसकी प|ी के नाम इलाहाबाद बैंक में एक एकाउंट खोल कर पुलिस ने दो किश्तों में 4 लाख रुपए जमा कराये। लेकिन बाकी के रुपए और घर नहीं दिए।