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स्कॉटलैंड की वास्तुकला का सुंदर नमूना इमामभवन

7 वर्ष पहले
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स्कॉटलैंड की वास्तुकला का सुंदर नमूना इमामभवन

सै यदहसन इमाम भवन पहले बैरिस्टर और बाद में सक्रिय राजनीतिज्ञ का निवास रहा। यह भवन स्काॅटलैंड के ट्यूडर किलों की तरह वास्तुकला का सुंदर नमूना है। इसके चारों कोनों पर बुर्ज और छज्जों पर तीर चलाने वाले छिद्र हैं, जो किले के रूप में इस दिखाता है। इसमें गोथिक मेहराबों का खुलकर प्रयोग हुआ है और खिड़कियों में तिरछी नक्काशी की गई है। यह इमारत पटना की पुरानी इमारतों में बड़ी अलीशान है।

इम्दाद इमाम के सबसे बड़े और सर अली इमाम के छोटे भाई हसन इमाम फ्रेजर रोड के इलाके में कई प्रमुख इमारतों के मालिक थे। वे 1909 ईस्वी मेंे बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए। हसन इमाम वरिष्ठ बैरिस्टर और राष्ट्रवादी नेता थे। 1912 ईस्वी में हसन कोलकाता हाईकोर्ट के प्रथम बिहारी जज नियुक्त हुए। 1912 ईस्वी में बिहार-उड़ीसा परिषद के प्रथम निर्वाचित उपाध्यक्ष हुए। होम रूल आंदोलन से सविनय अवज्ञा आंंदोलन तक इनकी सक्रिय भूमिका रही। बिहार के विभाजन में इनका योगदान काफी महत्वपूर्ण था।

इस इमारत को हसन इमाम ने ही बनवाया था। उनकी वकालत की चर्चा दूर-दूर तक थी। वे प्रायः वकालत के सिलसिले में यूरोप के दौरे पर ही रहते थे। वहां के कई देशों में उन्होंने खूब पर्यटन किया। वे अपने लिए एक ऐसी ही इमारत बनवाना चाहते थे। यह शानदार इमारत हसन की परिकल्पना का परिणाम है। इमारत को बनाने में ब्रिटिश परम्परा का विशेष ख्याल रखा गया। उसी के मुताबिक आउट हाउस, पानी टंकी, विशाल खुला प्रांगण है और खूबसूरत बागीचा था। यह इमारत लगभग सौ कट्‌ठा में फ्रेजर रोड से जमाल रोड तक फैली है। इसकी जमीन हसन इमाम ने उस वक्त के जाने-माने वकील मजहरूल हक साहब से खरीदी थी। यह भवन आकर्षक इमारत साढ़े पांच लाख रुपए की लागत से सन् 1930 ईस्वी में बनकर तैयार हुई थी। इसके फर्श को बनाने में इटालियन टाइल्स का उपयोग किया गया था। इमारत के आंतरिक हिस्से को सजाने के लिए देशी-विदेशी कलाकृतियां खरीदी थीं।

हसन इमाम को इस इमारत से बहुत प्रेम था। उन्होंने इस भवन काे रिजवान नाम दिया था। ज्यादातर लोग इसे इमाम भवन कहते हैं। वैसे, उनके दिए नाम रजवान को भी लोग याद करते हैं। कुछ लोग इसे ईमान भवन भी कहते हैं। फिलहाल यहां सुरक्षा बल का कैंप हैं।

Âकिरण कुमारी