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गंगा में बराज का विरोध करेगा बिहार

7 वर्ष पहले
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गंगा नदी में बराज बनाने के केंद्र के निर्णय का बिहार विरोध करेगा। राज्य के जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि गंगा में बराज बनाने का सीधा मतलब होगा, गंगा को मृत्यु के समीप पहुंचाना। बिहार इसे कतई स्वीकार नहीं करेगा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि इलाहाबाद से हल्दिया तक जहाज चलाने के लिए 100 किमी के अंतराल पर बराज बनाए जाएंगे। इससे नदी में अपेक्षित जलस्तर मिल सकेगा।

मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि फरक्का बराज के बाद से ही गंगा नदी में गाद जमा होने की गति बढ़ गई है। नदी का तल भरता जा रहा है और इसकी निरंतरता समाप्त होती जा रही है। नदी का जीवन उसका प्रवाह होता है। प्रवाह टूट गया, तो इसका मतलब है नदी मर गई। गंगा नदी इस स्थिति में पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि केंद्र से इस संबंध में हालांकि आधिकारिक सूचना नहीं मिली है, पर जो जानकारी मिली है उसके अनुसार यूरोपीय देशों के कंसल्टेंट भी बहाल किए गए हैं।

केंद्र सरकार ने गंगा में बराज की योजना के पहले बिहार से कोई विचार-विमर्श नहीं किया।

इस समय गंगा में पानी की गहराई मात्र दो से तीन मीटर रह गई है। जहाज चलाने के लिए कम से कम पांच मीटर की गहराई 45 मीटर की चौड़ाई आवश्यक है।

गंगा नदी में ड्रेजिंग से या अन्य किसी प्रकार की खुदाई के माध्यम से तल को गहरा बनाकर ड्राफ्ट बढ़ाया जाए। परिवहन या बाढ़ की समस्या का निदान गाद प्रबंधन ही है।

गंगा नदी बिहार में 450 किलोमीटर की यात्रा करती है। यहां जनजीवन काफी हद तक इसपर निर्भर करता है। फरक्का में बराज बनने और बांग्लादेश से समझौता के बाद बिहार को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बराज बनने का बाद नदी में और गाद जमा होगा और प्रवाह खत्म हो जाएगा।