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राजधानी में होगी इमरजेंसी मेडिसिन में पीजी डिप्लोमा की पढ़ाई

7 वर्ष पहले
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रूबन हॉस्पिटल इमरजेंसी मेडिसन में दो साल का पीजी डिप्लोमा कोर्स कराएगा। इसके लिए अस्पताल ने टेक्सिला अमेरिकी विश्वविद्यालय से करार किया है। शहर में पहली बार इमरजेंसी मेडिसिन की पढ़ाई शुरू की जा रही है। यह कोर्स एमसीआई और यूजीसी मान्यता प्राप्त है। यह जानकारी अस्पताल के चेयरमैन कर्नल डॉ. एके सिंह ने दो दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन दी। इसका आयोजन रूबन इमरजेंसी हॉस्पिटल ने किया है। डॉ. सिंह ने कहा कि इमरजेंसी मेडिसिन की जानकारी नहीं होने से मरीज का सही और समय पर इलाज नहीं हो पाता। गंभीर मरीज को इमरजेंसी में क्या जरूरत है, इसकी अलग पढ़ाई है। इसी मद्देनजर इमरजेंसी मेडिसिन में पीजी डिप्लोमा कोर्स की शुरुआत की जा रही है।

भारतकी स्थिति गंभीर: उन्होंनेबताया कि 2012 में एक सर्वे हुआ था। उससे पता चला था कि तीन लाख 94 हजार लोगों की मौत सड़क हादसे में हो जाती है। इनमें 21 से 31 फीसदी लोगों की मौत सही समय पर इलाज नहीं होने से होती है। इनमें अधिकांश मरने वालों की उम्र 15 साल से 45 वर्ष थी। इसमें 77 फीसदी पुरुष थे। डॉ. सिंह ने बताया कि दुर्घटना के अलावा भी हो रही मौतों को देखा जाए तो पता चलता है कि विकसित देशों के मुकाबले भारत की स्थिति गंभीर है।

जरूरीहै विशेषज्ञता : सार्कक्रिटिकल केयर सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र रूंगटा ने कहा कि इमरजेंसी मेडिसिन एवं इंटेंसिव केयर के विकास में मेडिकल शैक्षणिक व्यवस्था बाधक है। उन्होंने कहा कि सल्फॉस से होने वाली मौत की संख्या एचआईवी से मरने वालों की संख्या से अधिक है। उन्होंने कहा कि आज इमरजेंसी मेडिसिन की जानकारी जरूरी है।

डॉक्टर-मरीजदोनों को फायदा: आपदाप्रबंधन के वाइस चेयरमैन अनिल कुमार सिन्हा कहा कि एेसे कांफ्रेंस के आयोजन राज्य के डॉक्टर और मरीज दोनों को फायदा होगा। सम्मेलन में पद्मश्री डॉ. एसएन आर्या, पद्मश्री डॉ. आरएन सिंह, डॉ. हिमांशु राय, डॉ. सारिका राय, डॉ. विजयशील गौतम, डॉ. संजीव कुमार, डॉ. अनिल सिंह, डॉ.नीता आदि मौजूद थीं।

होटल चाणक्या में हुए रूबन इमरजेंसी अस्पताल के सम्मेलन को संबोधित करते डॉ. एके सिंह।