कोर्ट की शरण में जाने की तैयारी कर रहे
व्याख्याता अभ्यर्थी
प्रदेश के विश्वविद्यालयों में लेक्चरर नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन पर बवाल बढ़ता जा रहा है। व्याख्याता अभ्यर्थी अनुकूल माहौल तैयार कराने काे लेकर सरकार पर दबाव बनाने में जुट गए हैं। माहौल पक्ष में बनता देख अभ्यर्थी अब कोर्ट की शरण में जाने की तैयारी कर रहे हैं। शनिवार को बिहार प्रदेश व्याख्याता अभ्यर्थी संघ के बैनर तले अभ्यर्थियों ने शिक्षा मंत्री वृशिण पटेल से मुलाकात की। अभ्यर्थियों ने नियुक्ति में यूजीसी के पीएचडी के लिए 2009 के एक्ट को लागू करने की मांग की।
अभ्यर्थियों का कहना है कि यूजीसी की गाइडलाइन के आधार पर प्रदेश का कोई भी अभ्यर्थी व्याख्याता बनने के योग्य नहीं हो पाएगा। शिक्षा मंत्री ने अभ्यर्थियों से वार्ता के क्रम में कहा कि राज्य सरकार अभ्यर्थियों को राहत देने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा समवर्ती सूची का मामला है। सरकार दिसंबर 2014 के नेट में सभी अभ्यर्थियों को शामिल होने का मौका दे रही है। अगर अभ्यर्थी उचित पात्रता हासिल कर लेंगे तो निश्चित तौर पर उन्हें बहाली में प्राथमिकता मिलेगी। संघ के प्रदेश अध्यक्ष डा. मिथिलेश चंद्र मुकुल ने कहा कि सरकार का व्याख्याता नियुक्ति मामले पर ढीला रवैया था। अब इस स्थिति में हमलोगों के समक्ष कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई चारा नहीं है। रविवार को अभ्यर्थियों की एक बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।
आरक्षण रोस्टर का नहीं हुआ अनुपालन
गृहविज्ञान से पीएचडी करने वाली डाॅ सुधा रानी ने कहा कि बीपीएससी की ओर से जारी व्याख्याता नियुक्ति के विज्ञापन में आरक्षण रोस्टर का अनुपालन नहीं किया गया है। गृह विज्ञान विभाग की लेक्चरर नियुक्ति में एसटी श्रेणी में कोई वैकेंसी नहीं दिखाई गई है। इस मामले को हम राजभवन से लेकर सरकार के स्तर तक उठाएंगे। उन्होंने मांग की है कि एसटी श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए सीट का निर्धारण कर फ्रेश विज्ञापन जारी किया जाए। अगर मांग नहीं मानी जाती है तो हम कोर्ट की शरण में जाएंगे।