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आरएसएस का मुखपत्र बन केन्द्र महिलाओं पर लगा रही है पाबंदी

7 वर्ष पहले
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पटना | राष्ट्रीयस्वयं सेवक संघ (आरएसएस) का मुखपत्र बन केन्द्र सरकार महिलाओं की आजादी पर रोक लगा रही है। यदि महिलाएं एकजुट होकर इस सरकार के खिलाफ अभी आवाज बुलंद करने में चूक गईं, तो 21वीं सदी के बजाए 19वीं सदी में जीने को मजबूर होना पड़ेगा। ये बातें एपवा की राष्ट्रीय सचिव कविता कृष्णन ने कहीं। वे सोमवार को एएन सिन्हा इंस्टीच्युट के सभागार में अ‌ाधी अबादी के बैनर तले एपवा द्वारा नैतिक पहरेदारी बनाम महिलाओं की आजादी पर आयोजित सेमिनार में उपस्थित महिलाओं को संबोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि महिलाएं क्या पहनें, क्या नहीं। इस बात को तय करने का अधिकार महिलाओं को होना चाहिए। 21वीं सदी के भारतीय परिवेश में अ‌ाधी आबादी को आजादी देने के बजाए केन्द्र की मोदी सरकार महिलाओं के लिए परिधान संबंधी गाइड लाइन जारी करने का प्रयास कर रही है। इसका हर हाल में विरोध किया जाएगा। डॉ. डीएन दिवाकर ने कहा कि सत्ता में बैठी सरकारें महिलाओं की आजादी पर रोक लगाने के बजाए कुपोषण में रोक लगाने की काम करें।