पटना के मौसम से डरा रावण, 5 फीट घटा कद
दशहराके दिन गांधी मैदान में जलाया जाने वाला रावण का पुतला इस बार 65 फीट ऊंचा होगा। पिछले साल पुतले की ऊंचाई 70 फीट थी। यह बदलाव पिछले साल के मौसम को देखते हुए किया गया है। पिछले साल दशहरा के दौरान तीन दिनों तक तेज हवा के साथ बारिश होने से रावण ठीक से जल नहीं पाया था। पानी और तेज हवा के कारण गल कर धराशायी हो गया था। कारीगरों के मुताबिक इस बार ऐसी स्थिति हो, इसके लिए रावण समेत कुंभकर्ण मेघनाथ के पुतलों में भी बदलाव किया गया है। इस बार कुंभकर्ण की ऊंचाई 60 फीट मेघनाथ की ऊंचाई 55 फीट होगी। पुतलों का निर्माण आर्ट कॉलेज से सटे स्वामी सहजानंद शिक्षण संस्थान परिसर में हो रहा है।
रावण की प्रतिमा का निर्माण करता मोहम्मद ज़फर।
^कला का कोई मजहब नहीं होता। मुसलमान होते हुए हिंदुओं के सबसे बड़े पर्व में भाग लेना बड़ी बात है। पिछले 35 वर्षों से गया में और 2008 से पटना में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले हम बना रहे हैं। इससे पहले अब्बा मरहूम मो. नूर पुतला बनाते थे। पुतले में कागज आदि का ज्यादा इस्तेमाल होता है। कोशिश होती है कि पुतला बनाने में काम आने वाली सभी सामग्री पूरी तरह जलकर खाक हो जाए। -मो. जफर,मुख्य कारीगर
ये हैं कमेटी में
अध्यक्ष-पीके लूथड़ा, महासचिव- पीआर गांधी, सचिव- अरुण कुमार और कार्यक्रम संयोजक- कमल नोपानी।
बांस, बांस का फट्ठा, बोरे का चट, कई तरह के पेंट, रंगीन कागज, रद्दी वाले कागज, सुतली, आटे की लेई और गोंद। बाद में पुतलों को उठाने के लिए नाइलॉन के रस्से का प्रयोग होता है। पुतले को क्रेन से उठाकर गांधी मैदान पहुंचाया जाता है।
गयाके मुस्लिम परिवार बनाते हैं पुतले
गयानिवासी मो. जफर, मो. अब्बास, मो. रफीक, मो. जुम्मन, मो. मेहराब आलम, शिव आदि मुख्य रूप से रावण के पुतले बनाने में लगे हैं। ये लोग 2008 से ही पटना में रावण का पुतला बना रहे हैं। हालांकि, इस काम में स्थानीय लोगों का भी उन्हें सहयोग मिलता है।
3अक्टूबर को जलेगा रावण
गांधीमैदान में 3 अक्टूबर को श्री दशहरा कमेटी ट्रस्ट की ओर से आयोजित समारोह में सूर्यास्त से ठीक करीब शाम 4:45 बजे रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतलों में आग लगाई जाएगी। इसके पहले गांधी मैदान में झांकी निकलेगी।
रावण इस बार राजस्थानी डिजाइनर ड्रेस में दिखेगा। मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतलों में भी पीला, नीला और गुलाबी रंग की चुनर