समय पर कराएं घुटने का प्रत्यारोपण
घुटनेमें दर्द की वजह से चलने फिरने में यदि कोई व्यक्ति लाचार हो जाता है तो यह समझना चाहिए कि उसे घुटना प्रत्यारोपण करना चाहिए। लेकिन, समय पर घुटना प्रत्यारोपण के लिए काफी कम लोग प्रयास करते हैं। देर हो जाने के बाद अगर कोई घुटने का प्रत्यारोपण करता है तो यह एक बड़ी चुनौती होती है। पीएमसीएच में सीएमई एवं कार्यशाला के दौरान हड्डी रोग के विभागाध्यक्ष डॉ. विश्वेंद्र कुमार सिन्हा ने ये बातें बताई।
जमशेदपुर से आए डॉ. वरुण चंद्रा ने बताया कि कैसे, कभी-कभी ऑस्टियो आर्थराइटिस के लिए एचटीओ (हाई टिबियल ऑस्टियोटोमी) किया जाता है। इसका जीवन 15 वर्ष का होता है।
पीएमसीएच के चिकित्सक डॉ. राकेश चौधरी ने बताया कि एेसे लोग भी घुटना प्रत्यारोपण के लिए सामने रहे हैं, जिनका घुटना काफी टेढ़ा है। पुराने समय में टीवी होने की वजह से घुटना जाम हो गया हो। इन परिस्थितियों में घुटना प्रत्यारोपण कठिन होता है, लेकिन ऐसा नहीं कि किया नहीं जा सकता। कार्यशाला का मकसद भी लोगों को जानकारी देना है। कार्यक्रम में पीएमसीएच के प्राचार्य डॉ. एसएन सिन्हा, डॉ. विश्वेंद्र सिन्हा, डॉ. एसएस झा, डॉ. वरुण चंद्रा, डॉ. आशीष सिंह, डॉ. एसएस झा, डॉ. एसके त्रिपाठी, डॉ. एचएन दिवाकर, डॉ. जॉन मुखोपाध्याय उपस्थित थे।