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पूर्वोत्तर भारत में हरित क्रांति का प्रभाव
पटना | रासायनिकखाद के अंधाधुंध प्रयोग से आए हरित क्रांति के दुष्प्रभाव से पंजाब के किसान उबर नहीं पाए हैं। जमीन बंजर हो रही है। जलस्तर 500 फीट तक नीचे चला गया है। कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों से लोग परेशान हैं। इसलिए, पूर्वोत्तर भारत में हरित क्रांति हो, लेकिन रासायनिक नहीं जैविक खाद से। किसानों, कृषि विशेषज्ञों डॉक्टर ने रविवार को एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट में आशा जीएम बिहार अभियान द्वारा पूर्वोत्तर भारत में हरित क्रांति का प्रभाव विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में ये बातें कहीं। राज्य किसान आयोग के अध्यक्ष सीपी सिन्हा ने कहा कि हरित क्रांति पर्यावरण संतुलन किसानों के हित में केंद्रित होना चाहिए। किसान मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नरेश सिरोही ने कहा कि बीटी बैगन और बीटी मक्के के लिए कोई जगह नहीं है। हरित क्रांति के प्रभाव पर शोध करने वाले डॉ. अमर सिंह आजाद ने कहा कि पहले वाली हरित क्रांति का झूठा उत्साह अब ठंडा पड़ गया है।