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सियासी संकट जदयू का अंदरूनी मामला नहीं, भाजपा का तिकड़म

6 वर्ष पहले
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कार्यकर्ता सम्मेलन अब एक को

पूर्वमुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा को बिहार के सियासी भूचाल पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की चुनौती दी है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की करारी हार के बाद नीतीश ने मंगलवार को 7 सर्कुलर रोड स्थित अपने घर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भाजपा बिहार के हालात को जदयू का अंदरूनी मामला बता रही है। अगर वह मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को समर्थन नहीं दे रही, तो इसका खुलकर एेलान करे। भाजपा भले ही ताजा हालात को जदयू का अंदरूनी मामला बताए, लेकिन यह पूरा तिकड़म भाजपा का है।

भाजपा की चाल थी कि मांझी से उल्टा-सीधा काम कराए वह और जदयू की सरकार बताकर बदनामी करे मेरी। मैं सरकार तो पहले ही छोड़ चुका था, अब क्या पार्टी भी छोड़ देता? भाजपा कहती है कि हम ही सबकुछ थे, तो फैसला ले लिया तब आपको (भाजपा) परेशानी क्यों होने लगी? मैंने कभी जंगलराज शब्द नहीं बोला, वे लोग ही बोला करते थे।

अब भाजपा बताए कि उसने बिहार में कौन-सा हालात बना डाला। मांझी से जुड़े सवाल पर कहा- अब मुझे वहां नहीं पहुंचा दीजिए कि मांझी की बातों का जवाब देना पड़े। यह पूछे जाने पर मांझी का मुख्यमंत्री के लिए चयन गलत फैसला था, नीतीश ने कहा कि जब मांझी ने भी कह दिया है कि मेरी (नीतीश) मति मारी गई थी, तब मेरे कहने के लिए अब भी कुछ बच जाता है।

दिल्ली से गए, अब देश से

भी जाएंगे नरेंद्र मोदी

नीतीशने कहा कि नरेंद्र मोदी की हवाबाजी अब नहीं चलने वाली। दिल्ली तो देश की राजधानी है। जहां वे लोग बैठे हैं, वहां ऐसा परिणाम आया तो सारे देश में भी यही होगा। दिल्ली की जनता को बधाई कि उसने पूरे देश को साफ-साफ संदेश दिया। राजनीति के इतिहास में ऐसी पहली बार हुआ है जब जनता का मूड इतनी जल्दी बदला हो। अब भाजपा का बिहार से भी सफाया हो जाएगा। दिल्ली का संदेश पूरे देश में चला जाएगा। भाजपा ने वादा कर भी बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिया। इसी वजह से दिल्ली में बसे बिहारवासी खुलकर आम आदमी पार्टी के साथ चले गए।

राज्य में सुशासन बचाने

के लिए आया आगे

नीतीशने कहा कि बिहार में सुशासन धराशाई हो रहा था। साढ़े आठ साल तक दिन-रात एक कर मैंने हालात को बदला। जब सबकुछ गडमड हो रहा था, तो क्या मैं हाथ पर हाथ धरे बैठा रहता। सुशासन को बचाने के लिए मुझे आगे आना पड़ा। मेरी प्रतिबद्धता राज्य के लोगों के साथ है। लगातार खराब हालात को मैं भला कैसे बर्दाश्त कर लेता? मुझ पर रिमोट से सरकार चलाने का आरोप लगता रहा, पर अब तो सामने गया कि रिमोट से कौन चला रहा है? हमारे विधायकों से वे दो ही वादे कर रहे हैं। पहला, मंत्री का पद और दूसरा भाजपा का टिकट। बिना संकेत वे भाजपा के टिकट की बात कैसे कर रहे हैं?

जदयू का राज्य स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन अब एक मार्च को गांधी मैदान में होगा। ताजा राजनीतिक संकट को देखते हुए पार्टी ने 15 फरवरी को प्रस्तावित सम्मेलन की तिथि आगे बढ़ाने का फैसला किया। यह जानकारी प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने दी।

गुप्त मतदान की मांग पर जताई आपत्ति

नीतीशने मांझी द्वारा विधानसभा में गुप्त मतदान कराने की मांग पर आपत्ति जताई। कहा- विधानसभा का कामकाज कार्य संचालन नियमावली से होता है। वहां सबकुछ पारदर्शी तरीके से होता है। गुप्त मतदान कराकर क्या संविधान की धज्जियां उड़ाई जाएंगी?

सत्र में हम मुख्य विपक्षी दल का करेंगे दावा

नीतीशने कहा कि राज्यपाल अगर एक दिन का विशेष सत्र बुलाकर मांझी को बहुमत साबित करने का मौका देते हैं, तो जदयू उस सत्र में मुख्य विपक्षी दल की मान्यता के लिए अपना दावा पेश करेगा। हमने पहले राज्यपाल के पास विधायकों की परेड कराई है।

प्रेस वार्ता में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व मंत्री विजय कुमार चौधरी।