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सब जानना चाहते हैं आखिर होगा क्या?

6 वर्ष पहले
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पुरानासचिवालय। सूबे के इस सत्ता प्रतिष्ठान में मंगलवार को भी चर्चा और मंथन का दौर जारी रहा। मंत्रियों के दफ्तरों में सन्नाटा था, हालांकि, वरीय नौकरशाही अपने चैंबरों में जमी थी। चर्चा दिल्ली में केजरीवाल की जीत और भाजपा की करारी हार की तो मंथन मांझी सरकार के भविष्य की। भाजपा का रुख क्या होगा, तो राज्यपाल इस मामले में क्या करेंगे। हालांकि, दोपहर बाद तीन बजे से थोड़ी चहल-पहल शुरू हुई। चार बजे से होने वाली कैबिनेट को लेकर सुरक्षाकर्मियों की आवाजाही शुरू हुई। चार बजते-बजते कैमरों के साथ अखबार और चैनलों के रिपोर्टरों की भीड़ सचिवालय में जमा हो गई। इंतजार था कि मुख्यमंत्री मांझी कुछ बोलें। लेकिन, उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया और सीधे अपने कक्ष की ओर बढ़ गए। यह पहली बार था, जब मुख्यमंत्री ने अपने आठ सहयोगियों के साथ कैबिनेट की बैठक की।

इस बीच उद्योग मंत्री भीम सिंह ने अतिरिक्त प्रभार की घोषणा होते ही ग्रामीण कार्य पथ निर्माण विभाग का अतिरिक्त प्रभार संभाल लिया। हालांकि, बाकी मंत्रियों ने अभी प्रभार ग्रहण नहीं किया है।