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2003 में नियुक्त शिक्षकों की जीत-हार में होगी अहम भूमिका

7 वर्ष पहले
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पूटा चुनाव के मुद्दे

22 सितंबर को होना है चुनाव

भास्करन्यूज | पटना

पटनाविश्वविद्यालय में शिक्षक संघ चुनाव की तैयारी अब धीरे धीरे तेज हो रही है। पहले एसएमएस के जरिए प्रचार का सिलसिला शुरू हुआ तो अब सीधे मुलाकात कर माहौल बनाने की कोशिश शुरू हो चुकी है। प्रत्याशियों के पास शिक्षकों के मूड भांपने का अब वक्त कम ही है, क्योंकि चुनाव 22 सितंबर को ही है।

प्रत्याशियों के निशाने पर एक समूह उन शिक्षकों का है, जो 2003 में नियुक्त हुए थे। इसमें 93 शिक्षक हैं, जिनके लिए सभी शिक्षक नेताओं के पास प्रस्ताव हैं। हर नेता चाहता है कि इन शिक्षकों के समूह को अपने साथ जोड़ ले। इसके अलावा अन्य कई मुद्दे भी हैं जिसमें शिक्षकों की सुरक्षा प्रमुख है।

कंफ्यूजनमें वर्तमान कमेटी

पूटाचुनाव में कुछ शिक्षक ऐसे भी हैं, जो पिछली बार पूटा की टीम में शामिल रहे। इनके पास अगर पिछले कार्यकाल में किए कुछ कामों काे भुनाने का फायदा है तो पिछली गलतियों का खामियाजा भी इन्हें भुगतना पड़ सकता है। वर्ष 2003 बैच के शिक्षकों के प्रति वर्तमान कमेटी भी आशान्वित है, क्योंकि इनके रीजन में ही प्रोमोशन का पेंडिंग मसला आगे बढ़ सका। 2003 बैच के शिक्षक अभी भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं है, क्योंकि इनका कहना है कि नियुक्ति के बाद से अभी तक दो प्रोमोशन मिलने चाहिए, जबकि एक ही मिला है। अब इन शिक्षकों के वोट निर्णायक हो सकते हैं, क्योंकि इनके 93 वोट हैं और वोटरों की कुल संख्या 349 है।

फिक्सेशन

राज्यसरकार द्वारा कॉलेज शिक्षकों के फिक्सेशन के मुद्दे पर शिक्षकों में रोष है। क्योंकि इसमें शिक्षकों को वित्तीय घाटा हुआ है। इस मुद्दे को सुलझाने का शिक्षक नेता बीड़ा उठाने की कोशिश में है।

प्रमोशन

पटनाविवि में प्रमोशन के मामले पर बवाल सबसे अधिक है, क्योंकि कई शिक्षक इसमें पीछे छूटे हैं। विवाद के साथ आने वाले दिनों में यह गर्म मुद्दा है, जिसपर शिक्षक राजनीति का असर दिखता ही है।

कुलपतिका फरमान

कुलपतिके शिक्षकों पर लागू किए गए मूवमेंट रजिस्टर सिस्टम, कैंपस में रहने की अवधि आदि पर शिक्षक एक मजबूत संगठन चाहते हैं, जो शिक्षकों की बात कह सके।

शिक्षकोंकी सुरक्षा

पटनाविवि कैंपस में शिक्षकों पर हमले की कई घटनाएं हुई हैं। इस मामले में भी शिक्षक चाहते हैं कि मजबूत संगठन बने, जो शिक्षकों के लिए स्टैंड ले सके।