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चलंत अस्पताल चला ही नहीं गांव की ओर

7 वर्ष पहले
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अनुपम कुमार > पटना 9334940256

1979मेंभारत को इग्लैंड से दान में 350 मोबाइल क्लिनिकल वैन मिले थे। तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री राजनारायण ने बिहार को 27 गााड़ियां दी थीं। सभी मेडिकल कॉलेज को तीन-तीन वैन मिले। वैन डिस्ट्रीब्यूशन का काम हेल्थ सर्विसेज वर्कशॉप, गुलजारबाग को दिया गया। अन्य मेडिकल कॉलेज ने तो अपना हिस्सा ले लिया, लेकिन पीएमसी और एनएमसी ने इनमें से दो-दो वैन ही लिया और एक-एक वैन को वर्कशॉप में छोड़ दिया। वर्षों इस्तेमाल नहीं करने के कारण अब काम के लायक नहीं रहे। चलंत अस्पताल के साथ-साथ वर्कशॉप परिसर में 10 मॉडल की सौ से अधिक गाड़ियां पड़ी हुई हैं, जिनकी अब तो मरम्मत संभव है और ही नीलामी हो पा रही है।

वैनका नहीं हुआ इस्तेमाल

पीएमसी,एनएमसी या अन्य मेडिकल कॉलेज को दिए गए वैन का कभी कभार इस्तेमाल हुआ भी, लेकिन हेल्थ सर्विसेज वर्कशॉप में खड़ी वैन खड़ी ही रह गई। कई वर्षों तक लगातार खड़ी होने के कारण वैन के टायर-टयूब भी खराब हो गए हैं। बैटरी डिस्चार्ज हो गई और खिड़की दरवाजे जाम हो गए।

गणतंत्रदिवस की झांकी के लिए हुई थी मरम्मत

लालूप्रसाद के मुख्यमंत्रित्व काल में पीएमसीएच का दौरा करते समय एक बार उनकी नजर इन गाड़ियों पर पड़ी। उन्होंने गाड़ियों के महत्व को देखते हुए मरम्मत का आदेश दिया और उनको गणतंत्र दिवस की झांकी में प्रस्तुत करने को कहा। मरम्मत के बाद पीएमसी-एनएमसी की अन्य चलंत अस्पतालों के साथ-साथ ये दोनों वैन भी गांधी मैदान ले जाए गए। वहां अस्पताल चला गांव की ओर के नाम से झांकी में दिखाए जाने के बाद कई महीने तक यह गाड़ियां वहीं खड़ी रही, उसके बाद तत्कालीन डीएम के आदेश से इन्हें वापस वर्कशॉप में पहुंचाया गया।

एकदिन भी नहीं चली गााड़ी

तबसे ये दोनों गाड़ियां वहीं खड़ी हैं। करीब 20 वर्षों से भी अधिक समय तक एक जगह खड़ी रहने के कारण इनके खिड़की और दरवाजे में एक बार फिर से जंग लग गया। अब यह खुलने लायक नही है। टायर-ट्यूब का ऊपरी भाग इस्तेमाल नहीं होने के कारण अभी नया दिखता है। इसका निचला हिस्सा पूरी तरह खराब हो चुका है। ज्यादातर पुर्जे जंग और बहुत दिनों तक इस्तेमाल नहीं होने के कारण काम के लायक नहीं है। इस गाड़ी को कुछ साल पहले विभाग द्वारा बनवाने का भी प्रयास किया। वर्कशॉप के द्वारा इसके पार्ट्स खरीदने के लिए मिस्त्री को कोलकाता भेजा गया, लेकिन पार्ट उपलब्ध