अपराध में राबड़ी से आगे नीतीश राज
नहर प्रणालियों से खेती को नुकसान
नहरप्रणालियों की वजह से खेती की जमीन को नुकसान होता है। खासकर ऐसे राज्यों में जिनका क्षेत्रफल कम है। लिहाजा खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए नहर की बजाय नलकूपों पर भरोसा करना अधिक कारगर होगा। यह तथ्य एफिशिएंसी ऑफ लैंड यूज इन बिहार नामक रिपोर्ट में सामने आया है। इस रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि नहर बनाने में बड़ी मात्रा में खेती की जमीन का उपयोग हो जाता है। इससे कृषि भूमि का क्षेत्रफल कम हो रहा है। योजना एवं विकास मंत्री प्रशांत कुमार शाही ने सोमवार को बिहार थ्रू फिगर्स 2013 के साथ इस रिपोर्ट को जारी किया। दोनों रिपोर्ट अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय ने तैयार की है।
दोनों रिपोर्ट में कृषि और वन क्षेत्र की जो तस्वीर दिखाई गई है, वह बिहार के लिए बहुत अधिक उत्साहवर्धक नहीं है। जिला, प्रखंड और पंचायत के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट से पता चलता है कि सरकारी दावे के विपरीत बिहार में वन क्षेत्र कुल भूमि का मात्र 6.65 प्रतिशत है, जबकि इसे कम से कम 10 प्रतिशत होना चाहिए। वन क्षेत्र का राष्ट्रीय औसत 22.95 प्रतिशत है। यह भी पता चला है कि वैशाली, मुंगेर, बेगूसराय और सुपौल में बंजर भूमि का तेजी से विस्तार हो रहा है, जबकि नालंदा, सारण, शिवहर, बेगूसराय, भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार, नवादा, पटना, गया, जहानाबाद, अरवल, लखीसराय, जमुई और शेखपुरा में जमीन परती रखने का प्रचलन बढ़ रहा है।
श्रेणी 2003 2012
हत्या 3652 3566
डकैती 1203 540
सेंधमारी 2925 3758
चोरी 10313 17667
दंगा 8189 10871
बलात्कार 804 927
अपहरण 1956 4737
फसल 1980-81 2010-11
चावल39183113
गेहूं22195094
मक्का7422108
जौ7516
मडुआ5909
अरहर7339
चना11959
गन्ना334311828
आलू8752010
प्याज82113
तिलहन75142
किसने क्या कहा
^राज्यकी प्रगति के लिए आंकड़ों पर शोध जरूरी है। जहां-तहां बिखरे आंकड़ों को समेट कर एक जगह रखा जा रहा है। इससे समस्या की तह तक जाने का रास्ता निकलेगा। पंकजकुमार, योजनासचिव
^11वींयोजना बनाते समय पता चला राज्य में डाटा बेस नहीं है। आधुनिक समाज में विकास दर की बात होती है। इस लिहाज से गुणवत्तापूर्ण आंकड़ों की जरूरत है। एएनपीसिन्हा, परामर्शी,योजना पर्षद
^किसीराज्य में जो कुछ संसाधन उपलब्ध है, उससे संबंधित तथ्यों का संकलन ह