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रजौली न्यूक्लीयर प्लांट की राह में फिर बाधा

7 वर्ष पहले
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पहले धनराज फुलवरिया जलाशय से मिलना था पानी

झटका

एनपीसीआईएल ने बिहार के प्रस्ताव को किया खारिज, पूछा-9 नदियां होकर गंगा का पानी कैसे पहुंचेगा

नौ नदियां होकर गंगा का पानी नवादा कैसे पहुंचेगा? यह सवाल उठाते हुए न्यूक्लीयर पावर काॅरपोरेशन ऑफ इंडिया लि. (एनपीसीआईएल) ने रजौली में प्रस्तावित न्यूक्लीयर पावर प्लांट को इस माध्यम से पानी आपूर्ति का राज्य सरकार का प्रस्ताव ठुकरा दिया है।

एनपीसीआईएल की आपत्ति के बाद बिहार के पहले न्यूक्लीयर पावर प्लांट पर फिर से संकट के बादल मंडराने लगे हैं। दरअसल, इस जलापूर्ति परियोजना में कई पेच सामने आए हैं। 100 किलोमीटर लंबी परियोजना में गंगा के पानी को 90 गांव, 9 नदियां, 3 नेशनल हाईवे, 4 स्टेट हाईवे और कई रेलवे क्रासिंग होकर गुजरना है। यही नहीं एनपीसीआईएल के अनुसार गंगा से रजौली के प्रस्तावित परियोजना स्थल की ऊंचाई 115 मीटर से अधिक है।

ऐसे में वहां पानी कैसे पहुंचेगा? राज्य सरकार इस परियोजना के लिए पिछले सात वर्षों से पानी की तलाश में जुटी हुई है। एनपीसीआईएल द्वारा प्रस्ताव अस्वीकार करने के बाद सरकार ने अन्य विकल्पों पर विचार शुरू कर दिया है।

2800 मेगावाटका परमाणु बिजलीघर प्रस्तािवत है रजौली में

{पहले चरण में 700- 700 मेगावाट की दो इकाइयां लगेंगी।

3000एकड़जमीन चाहिए (पहचान पूरी)

160क्यूसेकपानी (अबतक तलाश जारी)

700-700 मेगावाट की चार यूिनट है प्रस्तावित

पहले प्रस्तावित धनराज जलाशय मौजूदा फुलवरिया जलाशय से पानी देने की योजना थी। पर, वहां 12 माह पानी की उपलब्धता को लेकर सवाल उठे तो राज्य सरकार ने गंगा से पानी देने का खाका तैयार किया। इसके तहत बख्तियारपुर से प्लांट तक पानी पहुंचाने की योजना बनी।

इन जगहाें से हो सकती है पानी की आपूर्ति: रजौलीके निकट प्रस्तावित धनराज जलाशय मौजूदा फुलवरिया जलाशय। भोजपुर में सहार, अगियागांव, मुफेदपुर। संग्रामपुर, खगड़िया के निकट गंगा से, बागमती कोसी से।

डॉ.रतन के सीएमडी बनने पर आई तेजी: डॉ.रतन कुमार सिन्हा के 2012 में एनपीसीआईएल के सीएमडी बनने के बाद बिहार की उम्मीद इस परियोजना को लेकर काफी बढ़ गई। डॉ. सिन्हा बिहार के ही हैं। उन्होंने इस दिशा में काफी काम भी किया। इस अवधि में एनपीसीआईएल के अधिकारी बिहार भी आए।