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मुख्यमंत्री की ब्रिटेन यात्रा की सार्थकता
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मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने हाल में ब्रिटेन की यात्रा की। चाहे कोई लाख आलोचना करे, पर विदेश यात्रा का उनका फैसला अच्छा था। दरअसल, इस देश के शासकों को और यहां तक कि सांसदों और विधायकों को भी विकसित देशों की यात्राएं जरूर करनी चाहिए। इससे उन्हें पता तो चलेगा कि उन देशों ने किस तरह अपने देशों को विकसित किया है और किन कारणों से हमलोग इस काम में बुरी तरह विफल रहे हैं। खैर श्री मांझी ने लौटकर बड़े उत्साह से यह बताया कि ब्रिटेन के उद्यमियों ने शिक्षा, स्वास्थ्य और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्रों में निवेश में रुचि दिखाई है। अगले माह उद्यमी बिहार आएंगे भी। पर, उससे पहले मुख्यमंत्री और बिहार सरकार को एक काम करना चाहिए। वे कम से कम प्रादेशिक राजधानी पटना की सड़कों पर व्याप्त ट्रैफिक अराजकता को तो समाप्त कराएं। शासन में बड़ी ताकत होती है। वह चाहे, तो यह काम असंभव नहीं। निवेशकगण यह जरूर चाहेंगे कि वे ऐसे प्रदेश में निवेश करें, कम से कम जहां की राजधानी में ऐसी ट्रैफिक अराजकता नहीं हो। बिहार सरकार को चाहिए कि वह तत्काल ऐसी व्यवस्था कर दे, ताकि निवेशकगण पहली नजर में पटना को देखकर ही निराश नहीं हो जाएं। पटना में ट्रैफिक अराजकता को समाप्त करने की मौजूदा कोशिश नाकाफी है।
जरूरीहो गया है नया पटना बसाना
कल्पनाकीजिए कि यदि इस बीच स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो सिर्फ दस साल बाद पटना की सड़कों पर कैसा नजारा होगा? तब पटना सचिवालय से पटना सिटी पहुंचने में पूरा दिन लग जाएगा। कोई कितना फ्लाईओवर बनवाएगा? वैसे जहां-तहां और जब-तब फ्लाईओवर बनाने का भी स्वार्थी तत्व विरोध करते रहते हैं। अतिक्रमण और ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने में अब तक तो सारी एजेंसियां फेल ही साबित हुई हैं। यहां तक कि तो शासन और ही अतिक्रमणकारी पटना हाईकोर्ट के आदेश तक का पालन कर रहे हैं। इस बीच पटना को भी स्मार्ट सिटी बनाने की बात चल रही है। सवाल है कि क्या मौजूदा पटना को कभी स्मार्ट बनाया भी जा सकता है? जहां के अनेक लोग सार्वजनिक भूमि और सड़कों पर अतिक्रमण करना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं, क्या वहां की सिटी को स्मार्ट बनाना भला संभव है? जहां नक्शे का उल्लंघन कर मकान, दुकान और अपार्टमेंट बनाना शान की बात मानी जाती है, वहां की सिटी कभी स्मार्ट हो सकती है? इस त