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सौम्या की मौत की जांच सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को सौंपी
आशियानानगरस्थित केशरीनगर के सौम्या को दुनिया से गए लगभग तीन साल हो चुके हैं। आज भी उसकी बातों को याद कर मां उमा सिंह की आंखें भर जाती हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गुरुवार को उसकी मौत की जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को दिए जाने के आदेश के बाद उनकी आंखों में आशा की नई किरण फूटी है। मां कहती हैं- सौम्या हर बात फोन पर बताती थी। 5 सितंबर 2011 को सुबह में उसने फोन कर बताया था कि कॉलेज की सीनियर्स रैगिंग करती हैं। 3 सितंबर 2011 को पहली बार रैगिंग हुई थी। तब सौम्या को बालकनी की रेलिंग पर चढ़ कर चलने को कहा गया था। पहले दिन उसने सीनियर्स की बात मानने से इनकार कर दिया था। इससे वह नर्वस थी। 5 सितंबर को भी उसके साथ रैगिंग हुई। सेकेंड ईयर की सीनियर स्टूडेंट्स ने उसे जबरदस्ती रेलिंग पर चलाया। इसके बाद वह हॉस्टल की चौथी मंजिल से नीचे गिर गई थी। इस घटना के कुछ देर पहले भी उसने फोन किया था। उसके सिर में दर्द हो रहा था। मैंने सिर में तेल लगा कर आराम करने को कहा था...। इतना कहते-कहते मां रोने लगती हैं।
बहनतूलिका भी उसी कॉलेज में पढ़ती थी
जबसौम्या रेलिंग से नीचे गिरी थी, तो उसकी बहन तूलिका सिंह कॉलेज में क्लास अटेंड करने गयी थी। तुलिका ने बताया- उस दिन मेरी तबीयत ठीक नहीं थी। इसलिए क्लास नहीं गई थी। सौम्या ने मुझे मैसेज किया था कि क्लास होते ही उसके पास जाओ। क्लास खत्म होने के बाद मैं खाना खाकर बाहर निकली तो खबर मिली की सौम्या की रैगिंग ली गई थी। वह चौथी मंजिल से नीचे गिर गई है। जब तक मैं पहुंचती उसे सवाई मानसिंह हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया था।
जयपुर स्थित राजस्थान कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग फॉर वीमेन में सौम्या और तूलिका ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में 2011 में एडमिशन लिया था। तूलिक का आरोप है कि हॉस्पिटल ले जाने के एक घंटे बाद भी उसका इलाज शुरू नहीं किया गया था। सौम्या बिल्कुल ठीक थी और बहुत अच्छे से बोल पा रही थी, फिर भी डॉक्टर ने पुलिस को सौम्या का स्टेटमेंट नहीं लेने दिया था। जिस कॉलेज में सौम्या और तुलिका ने एडमिशन लिया था, उसका चेयरमैन हॉस्पिटल का डायरेक्टर था। सौम्या के पिता मिथिलेश सिंह ने बताया कि इस कनेक्शन की वजह से कॉलेज प्रशासन और हॉस्पिटल प्रशासन मिले हुए थे। उन्होंने कहा कि हॉस्पिटल के डॉक्टर ने उन पर काफी दबाव डाला था कि वह अबॉर्शन के ऑपरेशन के लिए फॉर्म पर साइन कर दे। लेकि