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मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल आज से

7 वर्ष पहले
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मैथिलीभाषा साहित्य केवल पंडितों की भाषा नहीं है। यह भारतीय नेपाली संस्कृति की पहचान है। इस भाषा की समृद्धि को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की तर्ज पर राज्य में पहली बार मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल का आयोजन यूथ क्लब में किया जा रहा है। शुक्रवार से तीन दिनों तक चलने वाले इस फेस्टिवल का उद्घाटन भारत नेपाल के मैथिली साहित्यकारों द्वारा किया जाएगा।

गुरुवार को पत्रकार वार्ता में मैथिली लेखक संघ के अध्यक्ष नरेंद्र झा ने कहा कि यह फेस्टिवल भारत नेपाल की सामाजिक, सांस्कृतिक आर्थिक संबंधों में मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि तीन दिनों तक चलने वाले इस फेस्टवल में मिथिलांचल के तमाम व्यंजन, कलाकृति और हस्तशिल्प उत्पादों को प्रदर्शित किया जाएगा। वरिष्ठ पत्रकार सुकांत नागार्जुन ने कहा कि फेस्टिवल के माध्यम से मैथिली भाषा संस्कृति को समृद्ध करने के साथ बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। शहरों में रहने वाले मैथिलीभाषी युवाओं को लोककला के बहुस्तरीय प्रचार-प्रसार के लिए एकजुट किया जाएगा। फेस्टिवल के दौरान भारत नेपाल के जाने-माने कवियों द्वारा कवि सम्मेलन, लघु मैथिली फिल्म रक्ततिलक पूर्ण मैथिली फिल्म कखन हरब दुख मोर का प्रदर्शन नेपाल कलाकारों द्वारा परमेश्वर कापड़ि कृत नाटक टटकाल दर्शन का मंचन होगा।

मौके पर मैथिली लेखक संघ के महासचिव विनोद कुमार झा, सचिव विनोद कुमार, आयोजन समिति के संयोजक अशोक, रामानंद झा रमन, रंगकर्मी कुणाल, श्याम दरहरे सहित मैथिली लेखक संघ से जुड़े दर्जनों लोग मौजूद थे।

यूथ हॉस्टल में प्रेसवार्ता करते मैथिली लेखक संघ के अध्यक्ष नरेंद्र झा अन्य।