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जांच के बाद आईओ अभियोजक को देंगे साक्ष्य दस्तावेजों की फोटोकॉपी
किसीभी आपराधिक मामले में जांच पूरी होने पर अनुसंधानकर्ता (आईओ) को अब एकत्रित किए गए साक्ष्य और दस्तावेजों की फोटोकॉपी उस कोर्ट से संबद्ध अभियोजक को उपलब्ध करानी होगी, जहां आरोपपत्र समर्पित किया जाना है। अभियोजक को अगर ऐसा लगता है कि अनुसंधान में किसी तरह की कमी या गड़बड़ी है, तो वह तत्काल संबंधित एसएसपी एसपी को इस संबंध में रिपोर्ट देंगे। एसएसपी एसपी रिपोर्ट पर मामले के अनुसंधान की पुन: समीक्षा करेंगे। जरूरत पड़ी, तो आईओ को आगे की जांच का निर्देश देंगे। अनुसंधान और अभियोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर गृह विभाग ने सभी जिलों के डीएम, एसएसपी, एसपी अभियोजन पदाधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किया है।
दूसरी ओर, दोषमुक्ति के सभी आदेशों की समीक्षा के लिए भी नई व्यवस्था होगी। इसके तहत जिला स्तर पर सत्र न्यायालय एवं न्यायिक दंडाधिकारी के कोर्ट से पारित आदेशों की समीक्षा के लिए जिला राज्य स्तर पर समितियां गठित की गई हैं। सत्र न्यायालय द्वारा पारित दोषमुक्ति आदेशों की समीक्षा के लिए संबंधित जिला के लोक अभियोजक की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति होगी।
राज्यस्तरीय समिति का काम
राज्यस्तरीय समिति जिला स्तरीय समिति की रिपोर्ट, मंतव्य, उपलब्ध साक्ष्य एवं रिकार्ड की समीक्षा करेगी। समिति हर माह कम से कम एक बार नियमित रूप से बैठक करेगी। राज्य स्तरीय समिति की अनुशंसा प्राप्त होने पर गृह विधि विभाग आवश्यक अनुशासनिक कार्रवाई करेंगे।
समिति हर महीने कम से कम चार बैठकें करेगी। समिति दोषमुक्ति के आदेशों की समीक्षा के बाद यह चिह्नित करेगी कि अपराध के अनुसंधान, अभियोजन संचालन में किस स्तर पर चूक या गलती हुई और यह चूक जानबूझ कर अभियुक्त को बचाने के लिए की गई या अज्ञानतावश हुई है। किसी अनुसंधानकर्ता, अभियोजन पदाधिकारी को गंभीर लापरवाही या किसी प्रकार की त्रुटी या चूक के लिए चिह्नित किया जाता है तो अराजपत्रित कर्मचारी के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा सीधे जिला स्तरीय सक्षम अनुशासनिक प्राधिकार या नियंत्री पदाधिकारी को भेजेगी।