बाप दारोगा, बेटा निकला चोर
आजकीउपभोक्तावादी प्रवृति युवा को गलत रास्ते पर कैसे ढकेल देती है, इसको दर्शाता नाटक दरोगा जी चोरी हो गई का मंचन सोमवार को कालिदास रंगालय में किया गया। नाटक का मंचन बिस्तार संस्था के बैनर तले किया गया। नाटक ने अपनी मनोरंजक कहानी और शैली से समाज के समक्ष कई सवाल किए। सवाल खासकर उन अभिभावकों से किया गया जो अपनी व्यस्तता में अपने बच्चे को समय नहीं देते। इसका ख्याल नहीं करते कि उनका बेटा या बेटी क्या कर रहा है। जयवर्धन द्वारा लिखित इस नाटक का निर्देशन नीरज कुमार ने किया। नाटक का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव ने किया। वहीं मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा के कला एवं संस्कृति विभाग के महामंत्री वरुण कुमार सिंह ने शिरकत की। विशिष्ट अतिथि के रूप में राणा सिंह, रेखा माथुर, रजनीश कुमार, मोहन मिश्रा, खुशबू उत्तम और जितेंद्र यादव उपस्थित थे।
यहथी कहानी
लोहासिंह थाने में दरोगा रहता है। वह अपने बेटे दीपक को इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन यह सोच करवा देता है कि उसका बेटा पढ़ाई कर बड़ा काम करेगा। लेकिन बेटा गलत संगति में चोरी करने लगता है। एक दिन वह शहर के एक कंजूस क्लर्क बाबू शर्मा के यहां चोरी करने जाता है। बाबू शर्मा उस दिन अपनी बीवी के साथ कहीं बाहर गया हुआ होता है। इतने में वह बड़े ही आसानी से 20 हजार रुपए की चोरी कर लेता है। जब बाबू शर्मा घर आता है तो रुपए चोरी हुआ देख दंग रह जाता है। इसके बाद वह थाने में यह दर्ज करवा देता है कि उसके पचास हजार रुपए चोरी हो गए। मीडिया में भी रिपोर्ट जाती है। यह देख दीपक के दोस्त उसे परेशान करना शुरु कर देते हैं और अपना हिस्सा मांगने लगते हैं। अंत में वह तंग होकर बाबू शर्मा के पास जाता है। इसी बीच चोरी की छानबीन में उसका बाप लोहा सिंह भी पहुंच जाता है। वह अपने बेटे को चोर देख दंग रह जाता है। रिश्ते को किनारे रख वह कानूनन उसपर मुकदमा दायर करता है।
नाटक देखने पहुंचे मंत्री रामकृपाल यादव।
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ये थे कलाकार
रंजीत श्रीवास्तव, अमरजीत, प्रवीण उत्तम, नाजिया गुल, आईशा कुमारी, उज्जवल गांगुली, अक्षत प्रियेश, उमाशंकर, मो. खालिद. प्रशांत, अभिषेक, कोमल मिश्रा, नेहा शर्मा