पटना. राज्यपाल से आग्रह किया गया है कि जिस थर्मामीटर से नापना है, नाप लीजिए। नीतीशजी को अपार बहुमत है। 130 एमएलए उनके साथ हैं। जतरा कब है नीतीशजी से पूछिए, टाइम और डेट दीजिए और ओथ कराइए। ये बातें राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने राजभवन में राज्यपाल से मिलने के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहीं। उन्होंने कहा कि नीतीशजी को बुलाने में कोई कृपा की बात नहीं है। नंबर ऑफ गेम नीतीशजी के साथ है। राजद जदयू की पार्टनर दल है। राजद ने जदयू को समर्थन दिया है। किसी व्यक्ति विशेष को नहीं। लेट होने से हॉर्स ट्रेडिंग की बात सामने आएगी। विधायक दल का नेता होने के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के तर्क पर कहा कि मांझी किस दल में हैं?
वे किस दल के नेता हैं? जदयू के 97 विधायकों ने नीतीश कुमार को अपना नेता चुन लिया है। मांझी को जदयू ने हटा दिया है। विधानसभा अध्यक्ष ने नीतीश कुमार को जदयू नेता के रूप में मान्यता भी दे दी है। यह पूछने पर कि मुख्यमंत्री मांझी सिक्रेट वोटिंग की बात कर रहे हैं, लालू प्रसाद ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। मांझी के पीछे भाजपा के खड़े होने के सवाल पर कहा कि मांझी उनके मंत्रिमंडल में भी काम कर चुके हैं। कोई अपमानजनक बात नहीं कह सकते। उन्होंने अच्छा काम किया है।
लालू प्रसाद ने कहा कि मर्जर की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। फिलहाल राजद जदयू के साथ है। विधानसभा में राजद ने जदयू को समर्थन दिया है। जदयू ने नीतीश को नेता चुन लिया है। पर, वे (जीतन राम मांझी) कह रहे हैं कि हम नेता हैं। इस कारण राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने या विधायकों का खरीद-फरोख्त करने की भाजपा की किसी भी तरह की मंशा का करारा जवाब देने के लिए विधायकों को राजभवन के समक्ष ले जाया गया था। जबकि, अभी इसकी जरूरत नहीं थी। बावजूद किसी भी तरह की अलोकतांत्रिक कार्रवाई हुई, तो सड़क पर उतरेंगे।
राजद अध्यक्ष ने कहा- मांझी बताएं कि उन्हें सीएम किसने बनाया। यह ख्याल मांझी को रखना चाहिए। महादलित की बात कही जा रही है। वह भी नीतीश ने ही बनाया। पर मांझी ने अलबल बोलना शुरू कर दिया। जदयू परिवार में विवाद हो गया। जदयू ने उन्हें नेता पद से हटाकर सूचना दे दी है। इसलिए, कन्फ्यूज होने की जरूरत नहीं है। राज्यपाल महोदय ने कहा कि उन्हें ऐसी कोई सूचना नहीं है कि विधानसभा भंग करने के लिए मुख्यमंत्री मांझी को अधिकृत किया गया है। बाद में जदयू नेता सलीम परवेज और विधायक श्याम रजक मिले और दिल्ली लौट गए। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समर्थन में राजभवन के लिए मार्च करते जदयू विधायक। तेजी से राजभवन की ओर बढ़ रहे विधायकों पर जैसे ही कैमरे की लाइट पड़ी, उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी।