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रंगभूमि की स्थापना पर नुक्कड़ नाटक

6 वर्ष पहले
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पटना। बिहारइप्टा के राज्यस्तरीय रंभभूमि आंदोलन के तहत पटना इप्टा की ओर से पटना कॉलेज परिसर में मंगलवार को प्रो. रामशरण शर्मा रंगभूमि की स्थापना की गई। इस मौके पर जनगीतों, सूफी गीतों और नुक्कड़ नाटकों समेत विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई। छात्र-छात्राओं द्वारा जनगीत - और पार लगा दे मोरी नैया... नये संघर्ष का न्योता मिला है... अब मच उठा है दरिया... का गायन किया गया। इस अवसर पर पटना विश्वविद्यालय के प्रो. तरूण कुमार ने कहा कि प्रख्यात जर्मन नाट्यकार बर्तोल्त ब्रेख्त के 116वीं जयंती पर पटना कॉलेज में रंगभूमि की स्थापना से कॉलेज परिसर में सांस्कृतिक गतिविधियों का वातावरण बनेगा। इप्टा के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव डॉ. फिरोज अशरफ खां ने कहा कि राज्य में सांस्कृतिक माहौल विकसित करने के लिए इप्टा की ओर से राज्यव्यापी जनअभियान रंगभूमि आंदोलन चलाया जा रहा है। तानाशाही और फासीवाद के खिलाफ संघर्ष को मजबूत करने के लिए प्रतिरोध की जनसंस्कृति को मजबूत करना इसका उद्देश्य है। इसकी कड़ी में पटना कॉलेज में रंगभूमि की स्थापना की गई है।

हुए तीन नुक्कड़ नाटक

इस मौके पर तनवीर अख्तर निर्देशित और समरेश बसु की कहानी पर आधारित नुक्कड़ नाटक खुदा हाफिज, पीयूष सिंह निर्देशित और अलख नंदन लिखित नंगा राजा और मदन-राजीव निर्देशित नाटक चुप्पी का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में भाग लेने वाले कलाकारों में श्वेत प्रीति, निशा कुमारी, मारकंडे कुमार पाण्डेय, राजीव रंजन, अमृता भारती, प्रभात, विक्की, शशि, आर्यन, गुलशन, निर्भय, समता, मदन, कुंदन विवेक आदि शामिल थे।