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दो माह में तैयार हो जाएगा गांवों का मास्टर प्लान
दोमाह में सभी गांवों का अपना मास्टर प्लान होगा, जो उनके विकास का आधार बनेगा। श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में सोमवार को इंटेंसिव पार्टीसिपेट्री प्लानिंग एक्सरसाइज (आईपीपीए) के तहत \\\"हमारा गांव, हमारा विकास\\\' पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए ग्रामीण विकास मंत्री नीतीश मिश्रा ने ये बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि योजनाओं के चयन की इकाई वार्ड को बनाया गया है, ताकि वहां रहने वाले लोगों और स्थानीय जरूरतों के अनुसार इसका विस्तृत खाका तैयार किया जा सके। मंत्री ने कार्यशाला में आए पदाधिकारियों से कहा कि पांच से दस साल की अवधि को ध्यान में रखकर योजनाएं तैयार की जाएं। उन्होंने इस कार्य में ज्यादा से ज्यादा आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। कहा कि पदाधिकारी इसे रूटीन काम नहीं मानें। योजनाओं के निर्माण में आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए वार्ड के स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।
^गांव के स्तर पर विकास का खाका तैयार होने के बाद योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और गांवों का योजनाबद्ध विकास होगा। इसमें मनरेगा का लेबर बजट तैयार किया जाएगा और मनरेगा के नए दिशा-निर्देश के अनुसार 60 फीसदी ऐसे कार्य लिए जाएंगे, जो प्रत्यक्ष रूप से कृषि से जुड़े हैं। एसएमराजू, ग्रामीणविकास सचिव
केंद्र सरकार के निर्देश पर देश के 2500 अति पिछड़े प्रखंडों के गांवों के विकास की योजना तैयार की जा रही है। इस सूची में बिहार के 293 प्रखंड शामिल हैं, लेकिन राज्य सरकार सभी 534 प्रखंडों की मैपिंग करा रही है। इसके लिए केंद्र की ओर से प्रति वार्ड 6500 रुपए का आवंटन किया गया है।
पहले चरण में सभी वार्डों का नक्शा तैयार किया जाएगा। इसमें वार्ड के संसाधनों और जरूरतों को चिह्नित किया जाएगा। नक्शा बनाने का काम तीन दिनों तक चलेगा, जिसमें गांव के लोगों का भी सहयोग लिया जाएगा। इसके बाद वार्ड स्तर पर ग्राम सभा आयोजित कर लोगों से योजनाओं की स्वीकृति ली जाएगी। नक्शा में अनुसूचित जाति, जनजाति, महादलित और अन्य पिछड़े वर्ग के बसावटों को चिह्नित किया जाएगा। इसमें कृषि भूमि, पेयजल, सिंचाई के स्रोत, नहर, पोखर, चापाकल, सड़क, शौचालय आदि भी चिह्नित किए जाएंगे। साथ ही हर घर और उसमें रहने वाले लोगों का सर्वे होगा।