कानून का राज कहां है : हाईकोर्ट
जोसरकार चला रहे हैं जब उनको दिखाई नहीं देता तो हम क्या कर सकते हैं? निगम आयुक्त तो खुद को बचाने में लगे हैं। कानून का राज कहां है? शहर में मांस-मछली की बिक्री अवैध तरीके से सड़कों पर किए जाने और अवैध खटालों की चर्चा हुई तो न्यायमूर्ति वीएन सिन्हा ने इस आशय की टिप्पणी की। कोर्ट को बताया गया कि सचिवालय के सामने और उसके परिसर में सब्जी तथा अन्य सामान की बिक्री हो रही है। सड़कों के किनारे मांस-मछली की बिक्री हो रही है। न्यायमूर्ति सिन्हा तथा न्यायमूर्ति पीके झा की खंडपीठ को वकील एसएन पाठक ने फोटो दिखाते हुए कहा कि तस्वीरों से पता चलता है कि किस तरीके के से मांस-मछली बेचे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि केवल कोर्ट के हस्तक्षेप से ही कुछ हो रहा है।
न्यायमूर्ति सिन्हा ने कहा कि बोरिंग रोड में सुबह 6 बजे मैंने खुद देखा कि किस तरीके से खटाल सज जाते हैं। अब देखिए कि मि. राणा (एसएसपी) क्या करते हैं? उनको तो कार्रवाई करने काे कहा गया है। निगम के वकील प्रसून सिन्हा ने कोर्ट को बताया कि किराए के मकान और अपने मकान में मांस-मछली बेचने वालों को लाइसेंस दिया जाएगा। 72 वार्डों की सूची तैयार हो चुकी है। नोटिस भी दिया गया है। कुछ समय लगेगा, लेकिन धीरे-धीरे सबकुछ व्यवस्थित हो जाएगा। इसपर कोर्ट ने कहा कि नियमानुसार ही बिक्री होनी चाहिए।
पटना| न्यायपालिकाआरक्षण आंदोलन के बैनरतले संपूर्ण आरक्षण की मांग को लेकर गुरुवार को हाईकोर्ट स्थित अम्बेडकर प्रतिमा के पास आरक्षण समर्थक वकीलों और समाजसेवियों ने धरना दिया। संपूर्ण आरक्षण क्रांति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं अधिवक्ता अरुण कुमार के नेतृत्व में मुख्यमंत्री से मांग की गई कि पटना हाईकोर्ट में नियुक्त सभी आरक्षण विरोधी सरकारी वकीलों को बर्खास्त किया जाए। धरना पर बैठे वकीलों के अनुसार आरक्षण विरोधी वकीलों द्वारा आरक्षण के मुकदमों में कमजोर बहस करने के कारण अनुसूचित जाति, जनजाति, अत्यंत पिछड़े और पिछड़े वर्ग के प्रावधान को न्यायालय द्वारा रद्द कर दिया गया। आरक्षण संबंधी त्रुटि के कारण पहले के दोनों विज्ञापनों को निरस्त कर पटना उच्चन्यायालय से परामर्श कर फिर से आरक्षण कानून बनाने की मांग भी वकीलों ने की है। उसके बाद नया विज्ञापन निकाल कर न्यायिक सेवा के रिक्तपदों को भरने की भी मांग की गई। धरना में पूर्व न्यायाधीश एसएन चौधरी, पूर्व सिविल जज एमएल दास, आंद