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वकील समर्थन में सरकार का विरोध

7 वर्ष पहले
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केंद्रसरकार द्वारा आत्महत्या की कोशिश को अपराध की श्रेणी में नहीं रखने संबंधी नजरिये के मद्देनजर इससे संबंधित भारतीय दंड विधान की धारा 309 को हटाने के निर्णय का बिहार सरकार ने विरोध किया है, वहीं वकीलों ने इसे सराहनीय कदम बताते हुए समर्थन किया है।

राज्य के विधि सचिव अखिलेश कुमार जैन ने कहा कि आईपीसी की धारा 309 हटाने संबंधी केंद्र के प्रस्ताव के संबंध तत्काल कुछ नहीं बता सकते। इस तरह के प्रस्ताव पर राज्य सरकार अपनी राय राज्य विधि आयोग से परामर्श कर बनाती है। उधर, राज्य विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अभिजीत सिन्हा ने कहा कि आईपीसी की धारा 309 हटाने संबंधी प्रस्ताव आयोग के समक्ष आया ही नहीं है।

आपराधिक मामलों के जाने-माने वरीय अधिवक्ता कृष्णा प्रसाद सिंह ने कहा कि इस धारा को बनाए रखने का कोई आैचित्य नहीं रह गया था। इस संबंध में केंद्रीय विधि आयोग की सिफारिश और केंद्र एवं कई राज्य सरकारोें की सहमति न्यायसंगत है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष देवेंद्र प्रसाद सिन्हा ने कहा कि केंद्र का निर्णय स्वागतयोग्य है। मौजूदा सामाजिक परिस्थिति में आत्महत्या की कोशिश को अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए। अधिवक्ता प्रभाकर टेकरीवाल ने कहा कि इस मुद्दे पर काफी दिनों से मंथन चल रहा था। केंद्र का निर्णय सही है।