सरकारी तंत्र में मानवाधिकार हनन खूब
मानवाधिकारहननका नाम आते ही लोगों के जेहन में पुलिस का नाम जाता है, लेकिन इससे कहीं अधिक मानवाधिकार हनन दूसरी सरकारी महकमों द्वारा किए जाते हैं। मानवाधिकार का दायरा बहुत बड़ा है। राज्य के दर्जनों निगमों को सरकार ने भंग कर दिया है और उनके कर्मचारी पेंशन को तरस रहे हैं, यह भी मानवाधिकार हनन का मामला है। अधिवेशन भवन में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर बिहार मानवाधिकार आयोग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति बिलाल नजकी ने उक्त बातें कहीं। उन्होंने कहा कि बिहार में मानवाधिकार हनन के विरोध में 1907 में पहली बार चंपारण में नील की खेती करने वाले किसान राज कुमार शुक्ल ने किया था। आयोग के सदस्य नीलमणि ने अपने संबोधन में कहा कि मानवाधिकार की संरक्षा राज्य का दायित्व है। आयोग के सदस्य न्यायमूर्ति मान्धाता सिंह ने कहा कि आज भी लोग गुलामी में जी रहे हैं। कार्यक्रम को बिहार के लोकायुक्त न्यायमूर्ति सीएम प्रसाद, बगहा गोली कांड जांच आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राजेंद्र प्रसाद ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में प्रधान सचिव गृह आमीर सुबहानी, बिहार पुलिस के तमाम आलाधिकारी, जिलों से आए पुलिस अधिकारी, लॉ कॉलेज के छात्र-छात्रा और एनजीओ के लोग मौजूद थे।
पटना हाईकोर्ट के जज न्यायमूर्ति इकबाल अहमद अंसारी ने कहा कि मानवाधिकार का हनन केवल गरीबों का होता है ऐसा नहीं है। यह हनन अमीरों का भी होता है। समाज का हर व्यक्ति अगर असहाय लोगों की मदद करें तो यह भी मानवाधिकार का संरक्षण है। मानवाधिकार किसी कानून और संविधान का मोहताज नहीं है। कानून तो महज इसलिए है कि आपका मानवाधिकार दूसरों के अधिकार का हनन करें।
िबहार के डीजीपी पीके ठाकुर ने कहा कि मानवाधिकार को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है। मानवाधिकार का उल्लेख ऋग्वेद से लेकर अशोक के शासन काल तक होता है। इसकी जड़ें काफी गहरी है।
हर व्यक्ति के मानवाधिकारों का संरक्षण जरूरी
पटना।पटनाकॉलेज में मानवाधिकार दिवस पर पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) के अध्यक्ष प्रो.प्रभाकर सिन्हा ने कहा, हर व्यक्ति के मानवाधिकारों का संरक्षण जरूरी है। जेएनयू के प्रोफेसर आनंद कुमार ने कहा, जयप्रकाश नारायण ने मानवाधिकारों की रक्षा के लिए सभी को साथ आने का आह्वान किया था। मिथिला विवि के पूर्व कुलपति प्रो.जेपी सिंह ने कहा अपने देश में आंध्रप