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डॉक्टर और मेडिकल एजेंटों में साठगांठ, आगे आएं निजी संस्थाएं
स्वास्थ्यमंत्री रामधनी सिंह ने कहा कि किसी दवा की गुणवत्ता कंपोजीशन एक है, तो उसकी कीमत भी एक होनी चाहिए। यदि एक ही दवा विभिन्न नाम और अलग-अलग कीमत पर बिकती है, तो यह गलत है। इसमें डॉक्टर और मेडिकल एजेंट की सांठगांठ हो सकती है। इसके खिलाफ अभियान चलाएं। यह काम सरकार से नहीं हो सकता। निजी संस्थाओं को इसके लिए आगे आना होगा। इस आंदोलन में मेरा पूरा समर्थन रहेगा।
स्वास्थ्य मंत्री को बताया गया कि एक ही गुणवत्ता की दवा विभिन्न नामों और अलग-अलग कीमत पर बेची जाती है। यह सुनकर वह हतप्रभ रह गए। वह एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट में जन स्वास्थ्य अभियान बिहार की ओर से आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। चर्चा का विषय था दवा फ्री ड्रग्स फॉर ऑल। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि दवा का कंबिनेशन एक है, तो कीमत भी एक होनी चाहिए। राजस्थान के डॉ. एमके त्रिपाठी ने कहा कि कैंसर की एक महीने की एक दवा विभिन्न कीमतों पर बेची जाती हैं। एक ही कंपोजीशन की दवा की कीमत तीन हजार से एक लाख रुपए तक होती है।
कार्यक्रम में सभी को मुफ्त दवा मिले इस पर वक्ताओं ने चर्चा की। कार्यक्रम को डॉ. अमित सेन गुप्ता, डॉ. संजय पारीक, जनस्वास्थ्य अभियान ने शकील ऑक्सफैम के क्षेत्रीय मैनेजर परविंद कुमार प्रवीण, भासा के महासचिव डॉ. अजय कुमार, आईएमए के अध्यक्ष (इलेक्ट) डॉ. सच्चिदानंद कुमार, चार्म के चेयरमैन डॉ. पीएनपी पाल आदि ने भी संबोधित किया।
जेनरिक दवा अन्य दवाओं में फर्क नहीं
डॉ.त्रिपाठी ने कहा कि जेनरिक और बड़ी कंपनियों की दवाओं में कोई अंतर नहीं है। राजस्थान में जेनरिक दवाएं ही डॉक्टर मरीजों को लिखते हैं। सरकारी अस्पतालों में ऐसा करने के लिए सख्त निर्देश है। सभी लोग वहां जेनेरिक दवाएं ही लेते हैं। चाहे गरीब हो या अमीर। जेनेरिक दवाओं की दो बार जांच कराई जाती है। बीपी की एक महीने की दवा 10 रुपए में तो डायबिटीज की 17 रुपए में उपलब्ध है। टॉनिक का कोई महत्व नहीं है। फिर भी चिकित्सक टॉनिक लिखते हैं। सर्दी की एक दवा एक रुपए में आती, पर मरीज से 27 रुपए वसूल किया जाता है।
भारतदवा एक्सपोर्ट में तीसरे स्थान पर
डॉ.त्रिपाठी ने कहा कि राजस्थान में आकर कोई इलाज करा सकता है। मरीज से अस्पताल में किसी तरह का कोई प्रमाण नहीं मांगा जाता। राजस्थान मॉडल को नेपाल और ओडिशा भी अपना रहे हैं। इतना ही नहीं, इस मॉडल को जानने के लिए को