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स्कूलों में शिक्षक प्रश्नहल कर कहीं लिख रहे थे तो कहीं लिखवा रहे थे
72 हजार स्कूलोंमें तीन कक्षाओं के छात्रों की मूल्यांकन परीक्षा हुई
50लाख सेअिधक छात्र बैठे परीक्षा में
11बजे भीकई स्कूलों में नहीं शुरू की जा सकी जांच परीक्षा
38जिलों मेंपरीक्षा के लिए तैनात किए गए पर्यवेक्षण अधिकारी
स्कूलों में शिक्षक प्रश्नहल कर कहीं लिख रहे थे तो कहीं लिखवा रहे थे
तीसरी, पांचवीं सातवीं कक्षाके विद्यार्थियों के ज्ञान का स्तर देखना था
बिहार शिक्षा परियोजनापरिषद ने एक दिन पहले स्कूलों को भेजे थे प्रश्न
बिहार िशक्षा परियोजना परिषद की मूल्यांकन परीक्षा में शिक्षकों ने भरी उत्तरपुस्तिका
हिमाचल प्रदेश नेइससे पहले ली थी इस तरह की मूल्यांकन परीक्षा
बच्चों का टेस्ट शिक्षकों ने दिया
देवेंद्र तिवारी > पटना 8651992992
तीसरी,पांचवी और सातवीं कक्षा के छात्रों के लिए आयोजित मूल्यांकन परीक्षा राजधानी के सरकारी स्कूलों में बच्चों की जगह शिक्षकों ने दी। डीबी स्टार टीम ने परीक्षा के दौरान शहर के दर्जनों प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों का दौरा किया, यह तस्वीर सामने आयी।
सुबह 10 बजे शुरू होने वाली यह परीक्षा शहर के ज्यादातर स्कूलों में 11 बजे भी नहीं शुरू हो पाई थी। देरी पर जब शिक्षकों से बातचीत की गई, तो उन्होंने बताया कि उन्हें प्रश्न और उत्तर पुस्तिका ही देरी से मिली। जबकि, वास्तविकता यह थी कि सभी स्कूलों में शनिवार को ही इसे पहुंचा दिया गया था। परीक्षा के दौरान ज्यादातर स्क्ूलों में बच्चे दूर बैठ आपस में बातचीत में व्यस्त थे और शिक्षक बाकायदा उनकी कॉपियां हल कर रहे थे। गणित के लिए वह रफ का भी इस्तेमाल कर रहे थे। इसकी फोटोग्राफ्स भी डीबी स्टार के पास मौजूद है। नियम के मुताबिक बच्चों के नाम आदि के कॉलम को ही शिक्षकों द्वारा भरा जाना था, बाकी खुद बच्चों को करना था। परीक्षा की वजह से कई स्कूलों में तीसरी, पांचवी और सातवीं कक्षा को छोड़ अन्य बच्चों को छुट्टी दे दी गई थी।
बच्चोंने कहा- सर, बोले हैं जब हम बताएंगे तब लिखना
राजकीयकृत कन्या मध्य विद्यालय सलीमपुर, अहरा में 10.30 बजे के बाद प्रश्न और उत्तर पुस्तिका बंटने के बावजूद सभी बच्चे बैठे हुए थे। बच्चों ने बताया कि टीचर्स ने उनसे बोला है कि जब वह उत्तर बताएंगे तो उसे लिख देना। इसलिए वह नहीं लिख रहे हैं। डीबी स्टार के पास इसका वीडियो साक्ष्य मौजूद है।
कोई आए तो गुड मॉर्निंग कहना
राजधानी के ज्यादातर स्कूलों के बच्चों को शिक्षकों ने बताया था कि स्कूल में कुछ अधिकारी आएंगे। जब वह आएं तो तुरंत उठकर गुड मॉर्निंग बोलना। ऐसे में किसी के पहुंचने पर बच्चे ऐसा ही करते और फिर अपनी किताब निकाल कर बैठ जाते थे। उन्हे