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दैनिकभास्कर
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शिक्षा में गिरावट के लिए केवल शिक्षक दोषी नहीं
Áपिछले दिनों आपके अखबार में एक शिक्षिका के शैक्षणिक स्तर को लेकर एक समाचार प्रकाशित हुआ। वह शिक्षिका गया के डीएम के पास आवेदन देने गई थी। डीएम ने शिक्षिका से सामान्य ज्ञान का प्रश्न पूछा था। शिक्षिका के कम ज्ञान के लिए अकेले उन्हें ही दोषी ठहराना उचित नहीं है। अनुबंध के आधार पर शिक्षक नियोजन की पहल महज राजनीतिक लाभ के लिए था। आरक्षण के तहत 50 फीसदी महिलाओं की भर्ती की गई, जिनका शिक्षा से कोई खास सरोकार नहीं था। बहुत कम मानदेय पर काम करती हैं। कम या अधिक सभी लोग शिक्षा की बदहाली के लिए जिम्मेवार हैं।
उमानाथउपाध्याय, ढेलवां,पटना।
अंग्रेजीका महत्व कम हो
Áकिसी राष्ट्र के लिए सर्वमान्य भाषा ही राष्ट्रभाषा होती है। उसे शासन और जनता दोनों से मान्यता मिलती है। कोई देश विदेशी भाषा के सहारे नहीं रह सकता। वहीं आजकल लोग हिंदी छोड़ कर अंग्रेजी सीखने के लिए आकर्षित हो रहे हैं। अंग्रेजी बोलनेवालों को बुिद्धमान समझा जाता है। सरकार हिंदी को अब बढ़ावा दे रही है, पर उसकी रफ्तार बहुत धीमी है। अंग्रेजी से हल्का स्नेह रखना चाहिए, पर महत्ता हिंदी को ही मिलनी चाहिए।
अंसुझा, पटना।
इराकमें त्रासदी
Áइराक में महिलाओं बच्चों के साथ जिस तरह का अन्याय हो रहा है, वह दुनिया के लिए चिंताजनक है। प्रश्न यह नहीं है कि वे किस धर्म की महिलाएं हैं, यह तो मानवता पर अत्याचार है। महिलाएं कहीं भी हों, वे हमारी मां-बहनें हैं। जिस तरह इराक में महिलाओं का जनसंहार किया जा रहा है, उस पर अविलंब रोक लगनी चाहिए।
अशोकराम, राजेंद्रनगर।
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