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जहानाबाद सीएस पर फर्जी डाक्टर की जांच मामले में तथ्य छिपाने का आरोप

7 वर्ष पहले
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पैसेकी खातिर आम आदमी की जिंदगी से हो रहे खिलवाड़ पर जब बिहार मानवाधिकार आयोग ने सख्ती दिखाई तो राज्य स्वास्थ्य सेवा के निदेशक प्रमुख आर. डी. रंजन ने अपने ही विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने जहानाबाद के सिविल सर्जन को एक पत्र लिखकर पूछा है कि एक ऐसे फर्जी चिकित्सक के कारनामों की जांच में तथ्यों को क्यों छिपाया गया है।

निदेशक प्रमुख ने सिविल सर्जन से पूछा है कि आखिर मानवाधिकार आयोग जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं से भी संबंधित मामले में तथ्य छिपाकर प्रतिवेदन देने के लिए क्यों इस मामले को उच्च स्तर पर कार्रवाई के लिए संसूचित किया जाए।

अरवल जिले के कुर्था थाने के नदौरा गांव के हरि यादव ने मानवाधिकार आयोग से गीता कुमारी नामक एक चिकित्सक पर प|ी का गलत ढंग से आपरेशन कर 75 हजार रुपए ऐंठने का आरोप लगाया था। लाखों रुपये खर्च करने के बाद पटना के एक चिकित्सक ने उसकी जान बचाई। आयोग ने राज्य स्वास्थ्य सेवाएं के निदेशक जहानाबाद के एसपी से जवाब-तलब किया है।

मामले में तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. शोभा सिन्हा द्वारा गठित जांच टीम ने मानवाधिकार आयोग को सिर्फ मरीज के फिट होने की रिपोर्ट सौंपी थी। आयोग ने रिपोर्ट पर घोर आश्चर्य व्यक्त किया है। जांच टीम ने महिला चिकित्सक के फर्जी प्रमाण पत्र का जिक्र तक नहीं किया था। महिला ने खुद को डॉक्टर का सहायक बताया था लेकिन उसने जिस चिकित्सक का प्रमाणपत्र अपने अस्पताल में टांग रखा था उसे भी एक अन्य जांच टीम ने फर्जी घोषित कर दिया है।