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समाज को आईना दिखा गया ‘मिट्‌टी का माधव’

6 वर्ष पहले
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हरतरफ माधो का नाम है। सबकी जुबान पर उसकी चर्चा है। बातें उसी की ज्यादा हो रही हैं। राजनीति उसी पर हो रही है। योजनाएं उसी के लिए बन रही हैं। अधिकारी से लेकर मंत्री तक उसी की चिंता में मरे जा रहे दिखते हैं। सरकार इसके लिए चिंतित है। पर माधो की हालत दिनों दिन दयनीय होती जा रही है। भूखों मरने की नौबत गई है। समझ नहीं पा रहा की क्या करे। कहां जाए। किससे कहे अपनी व्यथा। माधो हमारे बीच का एक आम आदमी है।

आकाश रंगमंच खगौल के नुक्कड़ नाटक मिट्टी का माधो में आज की सामाजिक व्यवस्था में आम आदमी की हालत को बयान करते हुए विकासशील समाज के मुंह पर करारा तमाचा जड़ा। उदय कुमार द्वारा लिखित नुक्कड़ नाटक को सज्जाद आलम ने निर्देशित किया। संगीत जितेंद्र चौहान और मनीष दास ने दिया। नाटक में रामनाथ, राजेश कुमार शर्मा, रंजन सिंह, मो. तनवीर, शोएब कुरैशी, अमन कुमार, रंजीत कुमार, मुन्ना, मो. अनवर ने अभिनय किया। समाज को आइना दिखाते हुए तीन दिवसीय खगौल नुक्कड़ नाट्य महोत्सव का समापन सोमवार को हुआ। कलाकारों ने समाज के ठेकेदारों को एक बार फिर गिरेबान में झांकने पर मजबूर कर दिया। मौके पर वरीय मंडल कार्मिक अधिकारी गरिमा श्रीवास्तव, थानाध्यक्ष शिवाजी प्रसाद, अनिल कुमार, अर्चना मिश्रा, राजेश शुक्ला, प्रो. अंजुम अशरफी, मोहम्मद गालिब, अनीस अंकुर, उदय कुमार, सूत्रधार के महासचिव नवाब आलम सहित अन्य मौजूद थे।

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लेखक: सुधाकर अजयदेव

नाट्य रूपान्तरण : नीरज कुमार रंजन

निर्देशक : तनवीर अख्तर

संगीत : पीयूष

अभिनय : देवेन्द्र, नवनीत, सौरभ, राहुल, नीतीश, अमित, अविनाश, अनिशा।

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लेखक: समरेश बसु

निर्देशक : तनवीर अख्तर

संगीत : पीयूष सिंह

अभिनय : मदन, राजीव, कुन्दन, गुलशन, निर्भय।

नुक्कड़ नाटक महोत्सव में मिट्‌टी का माधव की प्रस्तुति करते कलाकार।