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सुविधाएं सफाई, एक तिहाई शिक्षक भरोसे साइंस की पढ़ाई

6 वर्ष पहले
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अनुपम कुमार > पटना 9334940256

बिहारकेसबसे विख्यात और पुराने कॉलेजों में से एक पटना साइंस कॉलेज की स्थिति भी इन दिनों खराब हो गई है। यहां शिक्षकों की संख्या घट कर एक तिहाई से भी कम रह गई है। इसके कारण कॉलेज को शिक्षा के उस स्तर को कायम रखने में समस्या रही है, जिसके लिए यह विख्यात रहा है। कॉलेज में कैंटीन, कॉमन रूम और टॉयलेट जैसी सामान्य सुविधाओं की कमी है। पानी पीने के लिए भी छात्रों को एक ब्लॉक से दूसरे ब्लॉक जाना पड़ता है। कॉलेज कैंपस में पहले जैसी शांति नहीं रही और आए दिन मारपीट की घटनाएं भी होती रहती हैं।

12वर्षों से नहीं की गई है शिक्षकों की नियुक्ति

कॉलेजमें पिछले 12 वर्षों से नए शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई जबकि इस दौरान कई शिक्षक सेवानिवृत हो चुके हैं। यहां शिक्षकों के 102 पद सृजित हैं, लेकिन केवल 32 शिक्षक ही कार्यरत हैं। कॉलेज में लगभग 1800 छात्र हैं। यूजीसी मानक के अनुसार शिक्षक छात्र अनुपात 1:25 होना चाहिए जो बढ़कर दोगुने से भी अधिक (1:56) हो चुका है। इससे शिक्षकों पर वर्कलोड बढ़ गया है।

गंदगीमें सोए रहते हैं कुत्ते

कॉलेजकैंपस में हर ओर गंदगी है। इधर-उधर कूड़ा पसरा रहता है और कुत्ते सोए रहते हैं। कॉलेज प्रशासन इसके लिए सफाई कर्मियों की कमी को दोष दे रहा है। कभी उनकी संख्या 20 हुआ करती थी, जो अब घट कर पांच रह गई है। पटना विवि के साइंस पीजी की पढ़ाई साइंस कॉलेज परिसर में ही होती है। वहां गणित, सांख्यिकी, पदार्थ विज्ञान, रसायन विज्ञान, वनस्पति शास्त्र, जन्तु विज्ञान, भूगर्भ विज्ञान, बायो केमेस्ट्री समेत आठ पीजी विभाग हैं। कॉलेज परिसर के दो तिहाई क्षेत्र में इनका फैलाव है। इनके द्वारा अपने स्तर पर सफाई की व्यवस्था नहीं की गई है। इसके कारण भी गंदगी फैल रही है।

एक्टिविटीरूम में मजदूर

स्टूडेंटएक्टिविटी रूम का निर्माण छात्रों की रचनात्मक गतिविधियों को प्रोत्साहन देने के लिए किया गया था, लेकिन पिछले दो वर्षों से उसका इस्तेमाल छात्र की बजाए मजदूर कर रहे हैं। कॉमन रूम की स्थिति बदहाल है। चार साल पहले इसका जीर्णोद्धार शुरू हुआ लेकिन ठेकेदार द्वारा बीच में काम छोड़ देने के कारण अब तक काम पूरा नहीं हुआ। गर्ल्स कॉमन रूम में भी सुविधाओं की कमी है। इसकी दीवार से बड़े-बड़े प्लास्टर के टुकड़े टूट-टूट कर गिर रहे हैं।

कैंटीन

एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक

एक्टिविटी सेंटर

गर्ल्स कॉमन रूम

कैंटीन केलिए जगह नहीं

इतना बड़ा और नामी कॉलेज होने के बावजूद इसमें छात्रों के लिए ढंग का एक कैंटीन नहीं है। कॉलेज परिसर स्थित कैंटीन सड़क किनारे स्थित चाय दुकान की तरह है। इसको टीचर क्लब में स्थानांतरित करने की योजना थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कुछ नहीं हुआ। अब कॉलेज प्रशासन जीर्णोद्धार के बाद इसे स्थानांतरित करने का दावा कर रहा है।

छात्र समस्याएं गिनाते नहीं थकते, मगर यहां सुनने वाला ही नहीं कोई

^गेट पर किसी प्रकार की चेकिंग नहीं है। कॉलेज कैंपस में कोई भी घुस सकता है। इसके कारण अापराधिक प्रवृति के लोग भी जाते हैं। उनके द्वारा कई बार मारपीट की घटनाएं हो चुकी हैं।

संजूराज

^कैंटीन में खाना नहीं मिलता सिर्फ चाय और स्नैक्स मिलता है। बैठने की व्यवस्था नहीं है। इससे परेशानी होती है। खाना खाना के लिए बाहर जाना पड़ता है, जिससे समय बर्बाद होता है।

अमरमेहता

^ पानी पीने के लिए एक ब्लॉक से दूसरे ब्लॉक में जाना पड़ता है। लाइब्रेरी में प्यास लगे तो छात्र मैथ डिपार्टमेंट जाते हैं और वहां भी टंकी खाली हो तो कैंटीन या कहीं और जाना पड़ता है।

पिन्टूकुमार साह

कई जगह हो चुका अवैध निर्माण

कॉलेज परिसर में कई जगह अवैध आवासों का निर्माण हो चुका है। इनमें से ज्यादातर पुराने कर्मियों या उनके बाल बच्चों के द्वारा निर्मित हैं। इससे कॉलेज की जमीन अतिक्रमित हो रही है और भविष्य के लिए एक बड़ी समस्या खड़ी हो रही है।

पेयजल की समस्या

कॉलेज में कई जगह पेयजल उपलब्ध नहीं है। एडमिस्ट्रिेटिव ब्लॉक में हिंदी, अंग्रेजी, गणित विभाग के साथ लाइब्रेरी भी स्थित हैं। इसमें केवल एक वाटर फिल्टर लगा है, जो प्राचार्य के कक्ष में है। इसके कारण छात्र इसका इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। जूलॉजी विभाग में भी पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है।

पटना साइंस कॉलेज का पुराना गौरव बस यादों में रह गया

पटना साइंस कॉलेज के प्राचार्य यू के सिन्हा से सीधी बात

शिक्षकोंपर बढ़ गया वर्कलोड

शिक्षकों की संख्या काफी घट गई है। क्या इससे शिक्षा का स्तर प्रभावित नहीं होता?

वर्कलोडकाफी बढ़ गया है। फिर भी हम शिक्षा के स्तर को बनाए रखने का प्रयास करते हैं।

कॉलेजमें सफाई की कमी है?

इसकेलिए सफाई कर्मियों की कमी जिम्मेवार है। विभिन्न पीजी विभाग के क्षेत्र की सफाई भी हमें ही करवानी पड़ती है, हालांकि उनपर हमारा कोई नियंत्रण नहीं।

स्टूडेंटएक्टिविटी सेंटर में मजदूर रहते हैं?

कॉलेजमें जीर्णोद्धार कार्य चल रहा है। मजदूरों को अस्थायी तौर पर रहने के लिए दे दिया गया है।

पूरेकॉलेज परिसर में अवैध निर्माण दिखाई देता है। इसे हटाने के प्रयास क्यों नहीं किए जाते?

यहमेरे अधिकार में नहीं है। वीसी इसके लिए अतिक्रमणकारियों को नोटिस दे चुके हैं। देखते हैं कुछ हो तो हो।

कईब्लॉक में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है?

जीर्णोद्धारके बाद एडमिस्ट्रिेटिव ब्लॉक, ब्वायज कॉमन रूम, गर्ल्स कॉमन रूम समेत चार जगहों पर इसकी व्यवस्था की जाएगी और ऑरो फिल्टर लगाया जाएगा।