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धांधली रुकी या नहीं, मगर जननी सुरक्षा का लाभ अटक गया
प्रसूताकोसही पोषण देने और मातृत्व मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से सरकार ने जननी सुरक्षा योजना शुरू की। इसके अंतर्गत शहरी क्षेत्र के महिलाओं को 1000 रुपए और ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को 1400 रुपए देना शुरू किया। सहायता राशि गलत हाथ में पहुंचने से बचाने के लिए नगद या बियरर चेक की जगह एकाउंट पेयी चेक देना शुरू किया। लेकिन प्रसूताओं की मदद के लिए बनाया गया प्रावधान ही अब उनके लिए ही मुसीबत बन गया है। बैंक एकाउंट नहीं होने के कारण छह महीने से कई प्रसूताओं के पैसे रुके हुए हैं। जन-धन योजना में खाता खेलने की मुहिम चलाए जाने के बावजूद यह स्थिति है। हाल यह है कि जाने-आने में ही सहायता राशि से अधिक पैसे खर्च हो चुके हैं।
नियम है कि प्रसूता के अस्पताल से डिस्चार्ज होते ही सारा पैसा दे दिया जाए। लेकिन कई मामले सामने आए हैं जिनमें फंड होने के बावजूद बैंक एकाउंट नहीं होने के कारण लाभार्थी को चेक नहीं दिया जा सका। प्राथमिक अस्पताल फुलवारीशरीफ में ऐसी 200 महिलाएं पंजीकृत हैं, जिनको प्रसव के बावजूद अब तक जननी सुरक्षा योजना की राशि नहीं मिली है। अस्पताल प्रशासन की मानें तो 25 जनवरी को फंड चुका है। इसके बावजूद उनमें से ज्यादातर को पैसा नहीं मिला है क्योंकि उनके पास बैंक एकाउंट नहीं है। ये महिलाएं फुलवारी शरीफ, खगौल, अनीसाबाद, जानीपुर आदि जगहों की रहने वाली हैं। गरीब तथा कम पढ़े-लिखे परिवार से होने के कारण उनके पास बैंक एकाउंट नहीं है।
बियरर चेक से नहीं होती थी परेशानी
मई 2014 तक जननी सुरक्षा योजना का पैसा बियरर चेक के माध्यम से दिया जाता था। इससे मरीजों के साथ-साथ अस्पताल प्रशासन को भी सुविधा होती थी। मरीजों के डिस्चार्ज होते ही चेक दे दिया जाता था। पर धांधली के कुछ मामले आने के बाद एकाउंट पेयी चेक दिया जाने लगा। नई व्यवस्था से उन मरीजों को परेशानी होने लगी जिनके पास बैंक अकाउंट नहीं है। कई वैसे मरीज भी हैं जिनके पास बैंक अकाउंट तो है, लेकिन अस्पताल के रिकॉर्ड में उन्होंने अपना निक नेम लिखवा दिया है। अस्पताल के रिकॉर्ड और बैंक एकाउंट में दर्ज नाम का मिलान नहीं हो पाने के कारण उनके चेक जारी नहीं किए जा रहे हैं।
जन-धन योजना के बावजूद नहीं खोले खाते, बैंक एकाउंट नहीं होने से महिलाओं को नहीं मिल पा रहा जननी सुरक्षा का लाभ
डिस्चार्ज के समय ही भुगतान का प्रावधान
परेशानी