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गरीब सवर्णों को नौकरी में आरक्षण, दलितों को ठेकों में प्राथमिकता

6 वर्ष पहले
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आज शाम राष्ट्रपति के सामने विधायकों की परेड कराएंगे नीतीश

बहुमतऔर अल्पमत की मंझधार में फंसी मांझी सरकार ने दलितों और सवर्णों को लुभाने के लिए बड़ा राजनीतिक दांव चला है। सरकार ने गरीब सवर्णों को सरकारी नौकरी में आरक्षण और 25 से 70 लाख रुपए तक के ठेके में एससी-एसटी को प्राथमिकता देने का फैसला लिया है।

मंगलवार को मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में ये निर्णय लिए गए। गरीबों को आरक्षण का फाॅर्मूला तय करने के लिए तीन सदस्यीय विशेषज्ञ कमेटी बनाई जाएगी, जो तीन महीने में रिपोर्ट देगी। सदस्यों के नामों की घोषणा जल्द होगी।

वहीं स्कूली छात्र-छात्राओं को साइकिल पोशाक राशि देने के लिए 75 फीसदी हाजिरी की शर्त में भी छूट दी गई है। अब सामान्य वर्ग के लिए 60 और आरक्षित वर्ग के लिए 55 प्रतिशत उपस्थिति ही जरूरी होगी।

राज्य में जारी सत्ता संघर्ष के पीछे ठेके में आरक्षण को भी अहम कारण माना जा रहा है। वहीं हाजिरी में छूट देने के सीएम के प्रस्ताव में तत्कालीन वित्त मंत्री विजेंद्र यादव ने अड़ंगा लगा दिया था। कैबिनेट ने दीघा में 205 परिवारों को मकान बनाने के लिए 3-3 डिसमिल जमीन देने का निर्णय भी लिया।

7मंत्री थे मौजूद

बैठकमें मांझी समर्थक सात मंत्रियों ने हिस्सा लिया। पीएचईडी मंत्री महाचंद्र सिंह मौजूद नहीं थे। वह कई दिनों से दिल्ली में हैं। शेषपेज | 10 पर







गरीब सवर्णों को...







गौरतलबहै कि मुख्यमंत्री ने नीतीश समर्थक दो मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया था, जबकि 20 मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया था। कैबिनेट विभाग के प्रधान बी.प्रधान ने बताया कि 23 निर्णय लिए गए। बिहार ठेकेदारी नियमावली 2007 की श्रेणी 3 और 4 में निबंधित ठेकेदारों का किसी टेंडर में समान दर होने पर एससी-एसटी के ठेकेदार को ही काम दिया जाएगा। इसके लिए बिहार लोक निर्माण संहिता की धारा 163 में संशोधन किया गया है। अब तक समान दर होने की स्थिति में लॉटरी से फैसला होता था। आरक्षण के दायरे में आने वाला एक ठेकेदार सालाना एक करोड़ रुपए तक के काम के लिए ही इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकेगा।

अन्य फैसले

- असहाय और 45 वर्ष तक की विधवा को खाद्य सुरक्षा

- सारण के दरिहारा भुआल में खुलेगा थाना

- मुजफ्फरपुर के डॉ.जगन्नाथ मिश्र कॉलेज में पुलिस ओपी

- सैनिक स्कूल तिलैया को 93 लाख रुपए

- पूर्वी चंपारण के मधुबन में डिग्री कॉलेज

- सुपौल, जमुई, कैमूर, बांका और गया के पॉलिटेक्निक के लिए 470 पदों का सृजन

- पटना और सीतामढ़ी छोड़ कर सभी जिलों में प्रेस क्लब

- 19 प्रखंडों में कार्यालय और आवासीय परिसर का निर्माण

- उद्यमिता विकास संस्थान को 80 लाख रुपए

- भारतीय भाषा संस्थान को 28 लाख रुपए

{जदयू, राजद कांग्रेस विधायक पहुंचे दिल्ली

{नोएडा के दो होटलों में ठहराया गया, शाम 7 बजे होगी परेड

मुख्यमंत्री मांझी ने मंगलवार को आठ मंत्रियों को विभिन्न विभागों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा। सीएम ने वित्त, वाणिज्य कर, स्वास्थ्य, जल संसाधन और भवन निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विभाग अपने पास रखा है। कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह को खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण, शिक्षा मंत्री वृशिण पटेल को संसदीय कार्य का अतिरिक्त प्रभार दिया है। भीम सिंह पथ और ग्रामीण कार्य, नीतीश मिश्रा राजस्व भूमि सुधार विभाग के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।

पढ़िएपेज 4 भी

जदयू विधानसभा में विपक्ष में बैठेगा। स्पीकर ने कहा कि जदयू ने विपक्ष में बैठने के लिए सीट देने का आग्रह किया था। हमने मांग स्वीकार कर ली है। जदयू का कहना है कि मांझी सरकार से उसका वास्ता नहीं है। जदयू विधानमंडल दल के नेता नीतीश हैं और मांझी को पार्टी ने निकाल दिया है। ऐसे में इस सरकार से जदयू का कोई लेना-देना नहीं है। नीतीश ने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया है। जब तक सरकार नहीं बन जाती तब तक जदयू विपक्ष में बैठेगा।

सीएम की कुर्सी की लड़ाई का नतीजा 16 फरवरी को तय होने के आसार हैं। सूत्रों के अनुसार मांझी को बहुमत साबित करने के लिए विशेष सत्र बुलाया जा सकता है। मांझी नीतीश राज्यपाल के सामने बहुमत का दावा पेश कर चुके हैं। 20 से बजट सत्र शुरू है। नीतीश ने राज्यपाल से कहा था कि आप किस सरकार का अभिभाषण पढ़ेंगे, सत्र से पहले तय होना चाहिए। ऐसे में 16 को विशेष सत्र बुलाने की संभावना है।

{पोशाक, साइकिल राशि के लिए हाजिरी में छूट

{दीघा में 205 परिवारों को मकान बनाने के लिए 3-3 डिसमिल जमीन