बिहारी भी दिल्ली में बने आप की ताकत
मिथिलांचल के संजीव झा भी बने विधायक
भाजपाई पिता के सपने को मुजफ्फरपुर की वंदना ने साकार किया, दोबारा विधायक बनीं
नवादा में गुजरा था सोमनाथ का बचपन, संघर्ष से मिला मुकाम, पर जड़ों से जुड़े रहे
नौकरी छोड़ अन्ना के आंदोलन में कूदे अब एमएलए हैं समस्तीपुर के तुराज
दिल्लीविधानसभा चुनाव में मुजफ्फरपुर की बेटी वंदना कुमारी ने लगातार दूसरी बार चुनाव जीतकर बिहार का नाम रौशन किया है। वरिष्ठ भाजपा नेता स्व. ब्रजकिशोर शर्मा की तीसरी बेटी वंदना कुमारी ने शालीमारबाग विधानसभा सीट से भाजपा के रेखा गुप्ता को पराजित किया। इसके पूर्व भी वंदना इसी सीट से निर्वाचित हुई थीं। चार बहनों और एक भाई में तीसरी नंबर पर वंदना मुजफ्फरपुर के पारू थाना क्षेत्र के छाप गांव में जन्म लिया था।
जन्म के कुछ दिनों के बाद वंदना के पिता परिवार के साथ शहर के मझौलियां मोहल्ले में घर बनाकर शिफ्ट हो गए। जनसंघ के साथ वर्षों रहे। मुजफ्फरपुर जिला भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष भी रहे। वंदना के दादा द्वारिका प्रसाद शर्मा 1980 में भागलपुर के अपर समाहर्ता थे। वंदना के पिता का विधायक बनने का सपना अधूरा रह गया। इस बीच वे अपने सभी बेटियों और बेटा को मन लगाकर पढ़ने की सीख देते रहे। वंदना अन्य भाई-बहनों में काफी तेज थी। शहर के प्रभात तारा स्कूल में प्लस टू पास करने के बाद एमडीडीएम कॉलेज से होम साईंस में स्नातक किया। पास करने के बाद 1996 में वंदना की शादी अहियापुर थाना क्षेत्र के बथना के सज्जन कुमार से हुई। सज्जन दिल्ली में एमवे कंपनी में सीनियर मार्केटिंग ऑफिसर हैं। शादी के दो वर्ष बाद वे प|ी को दिल्ली ले गए। वर्ष 2000 में नई पहल नामक एनजीओ की स्थापना की। वंदना की मां मालती शर्मा ने कहा कि पिता के अधूरे सपने को बेटी ने पूरा किया है। पिता को विधायक बनने का ख्वाब था। परन्तु वे बिना विधायक बने ही 2008 में स्वर्ग सिधार गए।
शालीमार बाग सीट से चुनाव जीतने के बाद वंदना के मायके मझौलिया और ससुराल बथना में जश्न का माहौल है। आस पड़ोस के लोग सुबह से ही टीवी से चिपके हुए थे। दो बार वोटों के अंतर में उतार-चढ़ाव से हतोत्साहित भी हुए। जैसे ही वंदना के जीत की घोषणा हुई कि खुशी का माहौल बन गया। बधाई दोने वालों का तांता लग गया।
वंदना कुमारी
संजीव झा
दिल्ली जाने के बाद भी सोमनाथ का नवादा से जुड़ाव रहा है, पिछले साल आए थे।
हिसुआ में 60 रुपए किराए के कमरे में मां पिता के साथ रहते थे
चाची रामकली देवी (टोपी पहने) लोगों के साथ खुशी से झूम रही थी, कहा कि गांव का नाम रौशन हुआ।
जाति की राजनीति के गढ़ से निकले सूबे के कुछ युवाओं ने सकारात्मक राजनीति में अपनी पहचान बनाई है और अपने गांव के लोगों परिजनों को फख्र का मौका दिया है। अन्ना के आंदोलन से बनी राह पर चलकर इन युवाओं को जो कामयाबी मिली उसका जश्न इनके करीबियों और परिजनों ने भी मनाया। उनके घरों होली के साथ दिवाली भी मनी।
दोबारा विधायक बनीं मुजफ्फरपुर की वंदना के मायके में जश्न का माहौल, उनकी मां को मिठाई खिलाते परिजन। फोटो: दयानंद पाठक