सभी ग्रामीण बैंकों का एकीकरण हो
विभिन्नबैंक और संगठन के 1000 से अधिक डेलीगेट्स के साथ पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में बैंक इंप्लाइज फेडरेशन(बेफी) का चार दिवसीय नौंवा राष्ट्रीय सम्मेलन मंगलवार को संपन्न हुआ। बैंक इंप्लाइज फेडरेशन, बंग्लादेश का प्रतिनिधित्व करते हुए मंजूर कादर सरकार एवं रुखसाना परवीन सरकार ने भी सम्मेलन में शिरकत की। सम्मेलन में दैनिक मजदूरों, संविदा पर नियुक्त मजदूरों की सेवा स्थायी किए जाने की मांग भी की गई। निजी बैंकों के राष्ट्रीयकरण के विरुद्ध संगठनों से एकजुट होने का आह्वान भी किया गया। अंतिम दिन कुल 13 प्रस्ताव पारित करते हुए विभिन्न मांगों को सुनिश्चित किया गया। देश में सभी ग्रामीण बैंकों को एक कर भारतीय ग्रामीण बैंक के गठन की मांग की गई। बैंकरों ने वेतन वृद्दि मुद्दे पर 25 से 28 फरवरी की घोषित राष्ट्रव्यापी हड़ताल को सफल बनाने का आह्वान किया।
एग्रीकल्चर बैंक ऑफ ग्रीस की अधिकारी एवं विश्व के 126 देशों के बैंक इंप्लाइज का प्रतिनिधित्व करनेवाली कैलियोपे पाटौना ने कहा कि दुनिया भर में बैंकरों की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने दैनिक भास्कर से बातचीत की।
भास्कर: सम्मेलन का अनुभव कैसा रहा।
कैलियोपे- दुनियाभर में बैंकरों की स्थिति चिंताजनक है। वर्कलोड अधिक है और सैलरी अन्य प्रोफेशन की तुलना में कम है। यह निजीकरण का नतीजा है।
भास्कर: बैंकों का तर्क है कि कंप्यूटर, इंटरनेट और तकनीक बेस्ड बैंकिंग से वर्क लोड घटा है।
कैलियोपे- तकनीक के आने से फायदा तो हुआ है परंतु क्या कोई भी तकनीक बैंकिंग को बिना मानवीय कर्मचारियों के मदद से पूर्ण कर पाएगी। हालात यही रहे तो आगे मुश्किल होगी।