राइनो संरक्षण को नहीं मिली मंजूरी
राइनोसंरक्षणक्षेत्र को केंद्रीय जू प्राधिकरण की मंजूरी नहीं मिली। मास्टर प्लान के अन्य हिस्सों पर तो केंद्रीय जू प्राधिकरण सहमत है लेकिन राइनो संरक्षण क्षेत्र को तत्काल मंजूरी देने के लिए तैयार नहीं है। राइडिंग रोड (एयरपोर्ट मोड़ से शेखपुरा) के बगल में स्थित राइनो संरक्षण क्षेत्र के लिए प्रस्तावित जमीन को अब एरिया फॉर फ्युचर एक्सपेंशन में रख दिया गया है। उस क्षेत्र का इस्तेमाल कैसे होगा, इसका निर्धारण भविष्य में तय किया जाएगा। इस प्रकार अब राइनो संरक्षण का निर्माण अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया है।
कई वर्षों से बनाई जा रही योजना
संजय गांधी जैविक उद्यान पिछले कई वर्षों से हर वर्ष अपनी खूबसूरती बढ़ाने और दर्शकों को अधिक से अधिक आकर्षित करने के लिए मास्टर प्लान बना रहा है लेकिन इसे अबतक केंद्रीय जू प्राधिकरण की मंजूरी नहीं मिल सकी है। हर बार प्राधिकरण अलग-अलग वजहों से आपत्ति करता रहा है। इस बार गैंडा संरक्षण को छोड़ अन्य योजनाओं पर प्राधिकरण सहमत हो गया है। यदि इसे मंजूरी मिल जाती है तो निश्चय ही यह संजय गांधी जैविक उद्यान की एक बड़ी उपलब्धि होगी।
अन्य योजनाओं पर बनीं सहमति
रेलवे लाइन की पटरियों को फिर से बिछाने, इसे इनक्लोजर के बीच से गुजारने आदि योजनाओं को केंद्रीय जू प्राधिकरण की सहमति मिल गई है। इसकी औपचारिक घोषणा होते ही इन सब परियोजनाओं पर काम शुरू हो जाएगा। इनमें से कुछ का पूरा वित्त पोषण केंद्रीय जू प्राधिकरण करेगा जबकि कुछ का खर्च प्राधिकरण और संजय गांधी जैविक उद्यान मिल-जुल कर करेंगे।
राइनो संरक्षण क्षेत्र संजय गांधी जैविक उद्यान की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। हालांकि यह मास्टर प्लान में भविष्य की योजना के रूप में ही वर्णित था लेकिन वर्तमान राइनो इनक्लोजर से यह कई मामलों में अलग होता। इन दिनों राइनों को तीन-चार अलग-अलग इनक्लोजर में रखा गया है। इनका समवेत क्षेत्रफल 16 एकड़ है। कुल 12 गैंडे इनमें रहते हैं। नया राइनो संरक्षण केंद्र 22 एकड़ में विस्तृत होता। साथ ही, यह पूरा क्षेत्र एक ही फेंस से घिरा होता। इससे गैंडो को घूमने के लिए काफी बड़ा क्षेत्र मिल जाता। इस क्षेत्र में पेड़-पौधे और झील पहले से ही स्थित हैं। दर्शकों के लिए भी ऐसे स्थल विकसित किए जाने थे, जहां से वे बिना गैंडे की नजर में आए ही उनको देख सकें। इससे गैंडे यहां खुद को अधिक सहज महसूस करते